प्रतीक्षा बस स्टैंड बना भारी वाहनों का पार्किंग यार्ड, डेढ़ दशक बाद भी शुरू नहीं हुआ

कोरबा के उपनगरीय क्षेत्र जमनीपाली में शहर के सार्वजनिक परिवहन का बोझ कम करने के लिए डेढ़ दशक पहले स्थापित प्रतीक्षा बस स्टैंड आज तक शुरू नहीं हो सका। अब यह बस स्टैंड रसूखदारों के लिए भारी वाहनों का अघोषित पार्किंग यार्ड बन गया है। ट्रक और अन्य भारी वाहनों के मालिक व ड्राइवर अपनी सुविधानुसार इस खाली पड़े मैदान का उपयोग कर रहे हैं।

प्रतीक्षा बस स्टैंड को मूल रूप से सिटी बसों के टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया था, ताकि इनके मरम्मत और रखरखाव का कार्य यहां हो सके। हालांकि, वर्तमान में सिटी बसों का संचालन सीमित है, और कुछ बसें इस बस स्टैंड में बिना उपयोग के पार्क की गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्य में इनका उपयोग संभव हो सकता है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है।

बस स्टैंड का भवन जर्जर हो चुका है। कांच और दरवाजे टूट गए हैं, और आसपास की स्थिति भी खराब है। बस स्टैंड के सामने बिजली विभाग ने एक सब-स्टेशन बना दिया है, जिसके बाद इसके मूल उद्देश्य के लिए उपयोग होने की संभावना और कम हो गई है। इसके बावजूद, आसपास कुछ दुकानें संचालित हो रही हैं, जो इस स्थान की उपेक्षा को और उजागर करती हैं।

प्रतीक्षा बस स्टैंड की खाली भूमि अब भारी वाहनों के लिए पार्किंग यार्ड बन चुकी है। ट्रक मालिक और ड्राइवर बिना किसी रोक-टोक के अपने वाहनों को यहां पार्क कर रहे हैं। नगर पालिका निगम की ओर से इस अनधिकृत उपयोग पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य के लिए बस स्टैंड बनाया गया था, वह पूरा नहीं हुआ, और अब यह रसूखदारों की सुविधा का अड्डा बन गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रतीक्षा बस स्टैंड को शुरू करने में देरी और इसकी उपेक्षा से शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि नगर पालिका निगम इस बस स्टैंड को इसके मूल उद्देश्य के लिए जल्द शुरू करे और अनधिकृत पार्किंग पर रोक लगाए।

नगर पालिका निगम और संबंधित विभागों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। प्रतीक्षा बस स्टैंड के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यदि इस दिशा में त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो यह महत्वपूर्ण ढांचा और बेकार हो सकता है।