दर्री पुलिस की मनमानी: संज्ञेय अपराधों में FIR से परहेज, फरियादियों को न्यायालय भेजने की सलाह

कोरबा। शहर के थानों में संज्ञेय अपराधों की शिकायतों को असंज्ञेय बताकर फरियादियों को न्यायालय की शरण में जाने की सलाह देने के मामले बढ़ रहे हैं। थानेदारों और विवेचकों की मनमानी के चलते कई मामलों में FIR दर्ज नहीं की जा रही, जिससे पीड़ितों की परेशानी बढ़ रही है।

ऐसी शिकायतें, जिनमें त्वरित FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, उन्हें टालकर फरियादियों को भटकने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे न केवल पीड़ितों का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि न्यायालयों पर परिवाद का बोझ भी बढ़ रहा है।

ऐसा ही एक मामला दर्री थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां दुकानदार हरेन्द्र कुमार साहू अपनी दुकान को हुए भारी नुकसान के बाद न्याय के लिए भटक रहे हैं। घटना 11 मई 2025 की शाम 4 से 5 बजे के बीच की है, जब पड़ोसी राम प्रसाद सिंह के बहुमंजिला भवन से एक लोहे का कूलर तेज हवा और बारिश के कारण हरेन्द्र की दुकान की छत पर गिर गया।

इससे दुकान की छत, वायरिंग, सीलिंग, पंखे, लाइट, कम्प्यूटर सिस्टम, लैपटॉप, फोटोकॉपी मशीन, प्रिंटर, सीसीटीवी, इन्वर्टर और रिपेयरिंग के लिए रखे बड़े LED टीवी सहित अन्य उपकरण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

MSME पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमी हरेन्द्र साहू ने बताया कि उनकी दुकान एक लोक सेवा केंद्र है, जहां प्रतिदिन स्थानीय नागरिकों की आवाजाही रहती है। गनीमत रही कि हादसे के समय दुकान बंद थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

उन्होंने पड़ोसी राम प्रसाद सिंह से नुकसान की भरपाई की मांग की, लेकिन मुआवजे से इनकार कर उल्टे दबाव बनाया गया।

हरेन्द्र ने दर्री थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उन्हें “फैना काटकर” न्यायालय जाने की सलाह दी गई।

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि राम प्रसाद ने बिना सुरक्षा मानकों के भवन की ऊपरी मंजिल पर भारी कूलर रखा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ।

उन्होंने यह भी बताया कि उक्त बहुमंजिला इमारत अनियमित ढंग से बनी है और उससे गुजरने वाली बिजली लाइनें अव्यवस्थित हैं, जो भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

हरेन्द्र ने प्रशासन से मांग की है कि भवन की अनुमति, बिजली कनेक्शन, सुरक्षा व्यवस्था और पंजीयन संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाए तथा दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।