कोरबा। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के बीच जहां देश आधुनिकता और विकास की राह पर अग्रसर है, वहीं कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित कुदरीचिंगार गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर, सरगुजा जिले की सीमा के निकट बसे इस अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए अभिशाप बना हुआ है।
कुदरीचिंगार की बदहाल स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस गांव तक पहुंच ही नहीं सकती, क्योंकि सड़क का नामोनिशान नहीं है।
ग्रामीणों को बीमार मरीजों को कांवर या झलिया में उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। वर्षों पहले प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़क रखरखाव के अभाव में गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जो बरसात में पूरी तरह बंद हो जाती है। जंगल से घिरे इस गांव में रात के समय जंगली जानवरों का खतरा मरीजों को अस्पताल ले जाने में जोखिम बढ़ाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार सरपंच, सचिव और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पिछले विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी थी, जिसके बाद स्थानीय नेताओं और अधिकारियों ने आश्वासन दिया था। हालांकि, वादों के बावजूद स्थिति जस की तस है। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने निराशा जताते हुए कहा, “हमें लगता है कि क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं?”
रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया ने बताया कि कुदरीचिंगार की समस्याएं उनके ध्यान में हैं। पक्की सड़क के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और शीतकालीन सत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने क्षेत्र की जरूरतों को संवेदनशीलता के साथ पूरा करने का भरोसा दिलाया।
ग्रामीणों ने सुशासन तिहार के अवसर पर प्रशासन से पक्की सड़क, नियमित बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य केंद्र की मांग की है।
उनका कहना है कि लंबा इंतजार अब और नहीं सहा जा सकता।क्षेत्र केजनप्रतिनिधियोंऔर प्रशासन से संवेदनशीलता की उम्मीद के साथ कुदरीचिंगार के लोग अब भी बेहतर भविष्य की आस लगाए हुए हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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