नरइबोध में गेवरा खदान के खिलाफ ग्रामीणों का हंगामा, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर खनन कार्य ठप

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) गेवरा प्रबंधन की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। नरइबोध के ग्रामीणों ने पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर खनन कार्यों को पूरी तरह रोक दिया है।

स्थिति बिगड़ने पर कुसमुंडा और दीपका पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

बंकिमोगरा क्षेत्र के एक पार्षद के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू किया। क्षेत्र में लंबे समय से पानी की किल्लत और खनन गतिविधियों के कारण भूजल स्तर प्रभावित होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के बाद न तो सभी को मुआवजा मिला, न ही रोजगार की व्यवस्था की गई। पुनर्वास का मुद्दा भी अधर में लटका है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन हर बार आश्वासन के बाद भी समस्याएं जस की तस हैं। पिछले एक साल में कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

नाराज ग्रामीणों ने अब खनन की प्रारंभिक गतिविधियों को रोक दिया। प्रदर्शन में पुरुष, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिन्होंने नारेबाजी कर कोयला कंपनी के संसाधनों के सामने डटकर विरोध जताया।

प्रबंधन की सूचना पर कुसमुंडा और दीपका पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे अब न तो आश्वासनों पर भरोसा करेंगे और न ही वादों के झांसे में आएंगे। उनका आरोप है कि एसईसीएल केवल कोयला उत्पादन और उपभोक्ताओं की जरूरतों तक सीमित है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही।

गेवरा क्षेत्र के सीजीएम एस.के. मोहंती और सब-एरिया मैनेजर रमेश सिंदूर से संपर्क की कोशिश नाकाम रही।

प्रदर्शन के कारण कोयला उत्पादन पर असर पड़ा है, और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे खनन कार्य शुरू नहीं होने देंगे।