इलेक्ट्रिक सिटी बसों के संचालन का टेंडर प्रक्रिया में, करना होगा इंतजार

प्रदूषण रहित आवागमन के लिए अच्छा विकल्प

कोरबा। किफायती और प्रदूषण रहित आवागमन कोरबा की बड़ी जरूरत बन गया है। केन्द्र सरकार ने कोरबा को इलेक्ट्रिक सिटी बसों की खेप देने वाला प्रस्ताव स्वीकृत किया है। अगर सभी तरह की प्रक्रिया पूरी हो भी जाती है तो सिटी बसों को सडक़ पर आने के लिए कम से कम 6 महिने का इंतजार तो करना होगा। यह समय कम ज्यादा भी हो सकता है।


कोरबा प्रदेश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है। ठंड के मौसम में यहां का एक्यूआई लेवल 300 तक भी दर्ज किया जा चुका है। ऐसे में प्रदूषण से हांफते कोरबा में प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में ई बस योजना काफी कारगर साबित होगी। राज्य में प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक यात्री परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में यह काफी महत्वपूर्ण कदम है।

राज्य के चार बड़े शहरों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में ई-बस सेवा शुरू होगी। कोरबा में सर्वमंगल कोरबा थीम के तहत विभिन्न काम हो रहे हैं। जिसके तहत शहर के चहुंमुखी विकास की योजना बनाई जा रही है।पीएम ई बस योजना के तहत कोरबा जिले को 40 ई बसों की स्वीकृति मिली है।जल्द ही इसकी आपूर्ति होगी।

कोरबा जैसे प्रदूषित शहर के लिए यह कदम नागरिकों को पर्यावरण के अनुकूल, सस्ता और विश्वसनीय यात्री परिवहन सुविधा प्रदान करेगा, जिससे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर सूडा और जिला स्तर पर शहरी लोक सेवा सोसायटी को नोडल एजेंसी के रूप में दायित्व सौंपा जाएगा।


कोरबा जिले और शहर में कई रूट ऐसे हैं, जहां सार्वजनिक यात्री सुविधाओं की आवश्यकता है. कोरोनाकाल के बाद सिटी बसों का भी नियमित तौर पर संचालन नहीं किया जा रहा है।

उपनगरीय क्षेत्र कुसमुंडा, गेवरा, बांकीमोंगरा, दर्री और रजगामार से बड़े पैमाने में लोग शहर आते हैं. फिर चाहे वह रोजमर्रा के कामकाजी लोग हो या फिर नौकरी पेशा युवा और कॉलेज जाने वाले छात्र सभी सार्वजनिक यात्री परिवहन की लचर व्यवस्था से जूझते हैं।