कोरबा में कोयला कामगारों के हितों के लिए सीएमपीएफ की बैठक, न्यूनतम पेंशन 5000 रुपये करने की मांग

कोरबा। कोयला कामगारों के हितों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत को देखते हुए कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (सीएमपीएफ) की 184वीं बोर्ड बैठक नई दिल्ली में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

बैठक में कामगारों के कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और क्रांतिकारी निर्णय लिए गए, जो भविष्य में कोयला कर्मियों की स्थिति में सुधार ला सकते हैं।

बैठक में पेंशन फंड को स्थिर करने के लिए सींगरेनी कंपनी को कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की अनुषंगी कंपनियों की तरह 20 रुपये प्रति टन की दर से सेस देने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सींगरेनी के सीएमडी ने स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, एनसीपीसी और अन्य कमर्शियल माइनिंग को सीएमपीएफ में शामिल करने की मांग की गई।

पेंशन फंड में बढ़ोतरी और कर्मियों की ब्याज दर में सुधार के लिए सीएमपीएफ फंड की निवेश दर को 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया, जिसमें म्यूचुअल फंड (ईटीएफ) में निवेश किया जाएगा।

बीएमएस संगठन ने 1971 के समय की न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये को बढ़ाकर 5000 रुपये करने की मांग उठाई। साथ ही, तत्कालीन सीएमपीएफ कमिश्नर के सेवानिवृत्त होने के बाद नए कमिश्नर की तत्काल नियुक्ति की मांग की गई।

बैठक में मई 2025 से सीएमपीएफ की कार्यप्रणाली को पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, सीएमपीएफ संस्थान में कार्यरत कर्मियों के पदोन्नति, स्थानांतरण और अवकाश से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सूत्रों का कहना है कि यदि इन सुझावों पर अमल किया गया, तो कोयला कामगारों के लिए कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।