कोरबा। कोरबा उत्पादन कंपनी ने मड़वा पावर प्लांट की 500 मेगावाट की बंद इकाई को लाइटअप कर उत्पादन में ले आया है। बावजूद इसके सेंट्रल सेक्टर से बिजली लेनी पड़ेगी। इसकी वजह उत्पादन कंपनी की क्षमता से कहीं अधिक डिमांड है। फुल लोड पर बिजली इकाइयां चलाई जा रही हैं। इससे संयंत्रों में कोयले की खपत भी बढ़ेगी।
उत्पादन कंपनी की क्षमता 2840 मेगावाट की है। क्षमता से अधिक डिमांड के कारण 120 मेगावाट क्षमता की बांगो हाइडल प्लांट की मदद लेते हैं। क्योंकि अनशेड्यूल बिजली महंगे दर पर खरीदनी पड़ती है।
पीक सीजन में बिजली की डिमांड को पूरा करने मांग के अनुरूप सप्लाई करने उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी पहले से ही कर ली जाती है। तय शेड्यूल से अधिक बिजली लेने पर बिजली कंपनी के बजट पर भी असर पड़ता है।
जरूरी रख रखाव के लिए मड़वा प्लांट की 500 मेगावाट की इकाई बंद होने पर उत्पादन से बाहर हो गई थी। अब इसे लाइटअप कर दिया गया है। इससे मांग के अनुरूप बिजली की सप्लाई में राहत मिली है। सोमवार को भी बिजली की डिमांड 5500 मेगावाट के पार होने से सेंट्रल सेक्टर पर निर्भरता बढ़ गई है।
मौसम में बदलाव के बाद अब आगे गर्मी बढऩे पर बिजली की मांग बढ़ेगी। पिछले साल गर्मी के सीजन में 6 हजार मेगावाट के करीब बिजली की अधिकतम डिमांड गई है। वहीं न्यूनतम डिमांड 3800 मेगावाट के करीब रही।
फरवरी में 5631 मेगावाट तक पहुंच गई थी डिमांड
इस साल फरवरी में ही 5631 मेगावाट अधिकतम डिमांड पहुंच गई है। बीते कुछ वर्षों में बिजली की डिमांड लगातार बढ़ी है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के इलेक्ट्रिक पावर सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर मांग रहने के अनुरूप उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी पूरी करली है।
ताकि प्रदेश में पीक सीजन में बिजली संकट की स्थिति निर्मित न हो। लेकिन सेंट्रल पुल से बिजली पहले की तुलना में अधिक लेने पर निर्भरता बढ़ जाएगी। 6700 मेगावाट के करीब बिजली की अधिकतम डिमांड होने का अनुमान लगाया है।
Editor – Niraj Jaiswal
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