कलेक्टर दयानंद की प्रेरणा ने बदल दी पहाड़ी कोरवा ममता की जिंदगी

कोरबा। आठ साल पहले स्कूल खुलने के दिन यानी एक जुलाई को ग्राम आंछीमार की पहाड़ी कोरवा ममता तब कक्षा दसवीं पास करके कक्षा 11वीं में ही पहुंची थीं। तब वह बहुत असमंजस में थी कि 11 वीं में कौन सा विषय लिया जाए, जो विषय ली है, वह ठीक है या नहीं..? उसके समाज में कोई ऐसा परिचित भी उन्हें नहीं मिल रहा था कि वह उससे पूछ सकें…।

विषय चयन सहित आगे की पढ़ाई को लेकर एक मोड़ पर उलझी ममता के लिए अचानक से कलेक्टर का घर आना उनके भविष्य के लिए एक नया रास्ता था।
उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि पहाड़ी कोरवाओं की इस छोटी सी बस्ती और तंग गली में कभी मोटर सायकल भी नहीं आता-जाता, उस गली से होकर उनके द्वार तक कलेक्टर की गाड़ी और स्वयं कलेक्टर आए हैं। ममता की खुशी का ठिकाना नहीं था।

कलेक्टर ने जब उनसे पूछा…कौन से क्लास में हो…नाम क्या है ? मैं कोरबा कलेक्टर पी दयानंद हूं…तो सबसे पहले ममता ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया और नाम बताते हुए कहा…तो सर आप ही कलेक्टर..है.! कलेक्टर से हाथ मिलाते ही उलझनों के मोड़ में उलझी ममता को प्रोत्साहन मिला कि उसकी जिंदगी बदल गई।

कलेक्टर ने तब उन्हें एक शिक्षक की तरह समझाते हुए बायोलॉजी सब्जेक्ट चयन करने और इससे बनने वाले कैरियर के विषय में बताते हुए एकाग्रता के साथ मन लगाकर पढ़ाई करने तथा पहाड़ी कोरवा समाज की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनने की बात कही।


कलेक्टर की बातों को गांठ बांधकर पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाया और बायोलॉजी से पहले 11वीं और 12वीं पास करने के बाद बीएससी, डीसीए, एमए की पढ़ाई पूरी की। किसी शिक्षक के रूप में एक कलेक्टर से मिले ज्ञान और अपनी पढ़ाई की बदौलत ममता ने आखिरकार कामयाबी हासिल की।

अब वह शिक्षिका बन गई है और प्रभारी प्रधानपाठक का दायित्व सम्हालने के साथ ही ग्रामीण विद्यार्थियों को ज्ञान की किताब पढ़ा रही है।  कोरबा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम आंछीमार की पहाड़ी कोरवा ममता शिक्षिका के रूप में प्राथमिक शाला चीतापाली में पढ़ाती है।

ममता ने 12वीं पास लडक़े से विवाह किया है। उन्होंने समाज के बच्चों को स्कूल जाने वाले मन लगाकर पढ़ाई करने तथा शिक्षकों को भी बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने की अपील की।