शासन ने 11 अप्रैल 2025 के विभागीय निर्देश का पालन सुनिश्चित करने जारी किया पत्र
रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ में सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत के पदों का प्रभार अन्य विभागों के अधिकारियों को सौंपने की व्यवस्था पर अब रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग ने इस संबंध में सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभागीय पदों पर नियुक्त अधिकारियों का प्रभार अपने स्तर से बदलने और उन्हें कार्य आवंटित नहीं करने जैसी स्थितियों से विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है तथा न्यायालयीन प्रकरण भी बढ़ रहे हैं।
7 अक्टूबर को जारी हुआ पत्र
आदिम जाति विकास विभाग के अवर सचिव की ओर से जारी पत्र क्रमांक 7464, दिनांक 7 अक्टूबर में विभागीय परिपत्र का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभाग के अंतर्गत कार्यरत सहायक आयुक्त, सहायक संचालक और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत का प्रभार अन्य विभागों के अधिकारियों को नहीं दिया जाना चाहिए।
विभाग के अनुसार, इस संबंध में पहले भी 11 अप्रैल 2025 को निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कुछ जिलों में इन निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति सामने आई है।
प्रभार बदलने से प्रभावित हो रहे विभागीय कार्य
शासन के पत्र में कहा गया है कि सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग और जनपद पंचायत CEO के पद महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े हैं। इन अधिकारियों को वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने, विकास योजनाओं के संचालन, कार्यों की स्वीकृति, निर्माण कार्यों की निगरानी और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।
इसके अलावा ग्राम पंचायतों से प्राप्त योजनाओं और प्रस्तावों के समन्वय सहित जमीनी स्तर पर विभागीय योजनाओं की निगरानी भी इन्हीं अधिकारियों के दायित्वों में शामिल है।
शासन के अनुसार, विभागीय अधिकारियों को कार्य की आवश्यकता के अनुरूप पदस्थ किया जाता है।
बिना शासन की जानकारी के बदला जा रहा प्रभार
जारी पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ मामलों में कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों द्वारा विभागीय निर्देशों का पालन किए बिना, शासन को जानकारी दिए बगैर प्रभार में बदलाव किया गया।
विभागीय अधिकारियों को अन्य स्थानों पर पदस्थ करने के बाद भी उन्हें जिम्मेदारी के अनुरूप कार्य आवंटित नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
विभाग का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों के कारण पिछले वर्ष कई न्यायालयीन प्रकरण सामने आए, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हुई और कामकाज पर भी असर पड़ा। इसी स्थिति को देखते हुए शासन ने संबंधित अधिकारियों को पूर्व में जारी विभागीय परिपत्र का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कोरबा में भी निर्देशों के पालन पर नजर
शासन के नए पत्र के बाद अब कोरबा सहित प्रदेश के अन्य जिलों में इन निर्देशों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जिन पदों का प्रभार दूसरे विभागों के अधिकारियों को दिया गया है, वहां अब क्या कार्रवाई होगी।
कोरबा जैसे बड़े जिले में विकास विस्तार अधिकारियों को जनपद पंचायत CEO का प्रभार दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में शासन के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। हालांकि, संबंधित पदों पर वर्तमान में प्रभार संभाल रहे अधिकारियों के संबंध में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, यह प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब देखना होगा कि शासन के निर्देशों का पालन प्रदेश के सभी जिलों में किस तरह सुनिश्चित कराया जाता है और प्रभार व्यवस्था में क्या बदलाव होते हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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