देवरानी-जेठानी से लेकर बुजुर्गों तक ने दी साक्षरता की परीक्षा

383 केंद्रों में आयोजित उल्लास महापरीक्षा में 98 प्रतिशत परीक्षार्थियों की भागीदारी, सीखने का जज्बा बना प्रेरणा

कोरबा। जिले में आयोजित उल्लास महापरीक्षा में उम्र, रिश्ते और परिस्थितियां सीखने की राह में बाधा नहीं बनीं। जिले के 383 उल्लास केंद्रों में आयोजित परीक्षा के लिए 7,817 परीक्षार्थी निर्धारित थे, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत ने परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा केंद्रों पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में सीखने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की प्राथमिक शाला समेलीभाठा में मां और बच्चे ने एक साथ परीक्षा दी। विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की 22 वर्षीय संतोषी बाई अपने बच्चे को गोद में लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचीं और परीक्षा दी।

इसी विकासखंड की प्राथमिक शाला पोड़ी पंडोपारा में 32 वर्षीय मंगली पंडो ने परीक्षा दी। वहीं 29 वर्षीय मनीता पंडो ने अपने पति राजा राम पंडो के साथ परीक्षा में शामिल होकर अपनी सीखने की उपलब्धि को परखा।

उम्र बनी न हौसले की बाधा

उल्लास महापरीक्षा में बढ़ती उम्र भी सीखने के उत्साह को कम नहीं कर सकी। लगभग 90 वर्षीय घुरवा सिंह ने परीक्षा में शामिल होकर सीखने की ललक का परिचय दिया। पाली विकासखंड के संकुल हरदीबाजार अंतर्गत प्राथमिक शाला न्यौसा में लगभग 78 वर्षीय जगोती बाई परीक्षार्थी के रूप में शामिल हुईं।

पाली विकासखंड की प्राथमिक शाला टेढ़ीकुआं में 46 वर्षीय दिव्यांग परीक्षार्थी घासी राम ने भी परीक्षा देकर सीखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

रिश्तों के साथ सीखने का भी संकल्प

कोरबा विकासखंड की शासकीय प्राथमिक शाला रोकबहरी में पारिवारिक रिश्ते भी साक्षरता के संकल्प से जुड़े नजर आए। यहां 47 वर्षीय जेठानी बूंद कुंवर और 42 वर्षीय देवरानी मोहरबाई ने एक साथ परीक्षा दी। वहीं कटघोरा उपजेल में निरुद्ध बंदियों ने भी उल्लास महापरीक्षा में भाग लिया।

परीक्षा के दौरान साक्षरता विभाग की परियोजना अधिकारी श्रीमती ज्योति शर्मा ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने परीक्षा से पूर्व जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों और नागरिकों से परीक्षार्थियों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में सहयोग देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि साक्षरता व्यक्ति, परिवार और समाज के सशक्तिकरण का आधार है।