बसाहट के बिना मकान खाली कराने का दबाव, चंद्रनगर-जटराज के 200 परिवारों ने उठाई आवाज

कुसमुंडा परियोजना के लिए दशकों पहले जमीन अधिग्रहण का दावा, ग्रामीण बोले पहले सड़क,बिजली और पानी की व्यवस्था हो

कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित दर्री तहसील के मसाहती ग्राम चंद्रनगर-जटराज के करीब 200 परिवारों ने बिना पूर्ण बसाहट व्यवस्था के मकान खाली कराने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन अलग-अलग चरणों में कुसमुंडा परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई, लेकिन लंबे समय बाद भी कई प्रभावित परिवारों को बसाहट की सुविधा नहीं मिल सकी है।

ग्रामीणों के अनुसार उनकी जमीन 1978-79, 1982-83, 1984-85 और अंतिम चरण में वर्ष 2010 में कुसमुंडा परियोजना के लिए अर्जित की गई थी। उनका दावा है कि अंतिम चरण के भूमि अधिग्रहण को करीब 16 वर्ष बीतने के बाद भी कई परिवार बसाहट के इंतजार में हैं।

मकान हटाने के लिए दबाव का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में उन्हें मकान खाली करने के लिए दबाव दिया जा रहा है। उनका कहना है कि मकान नहीं हटाने पर डोजरीकरण की कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। दबाव के चलते कुछ परिवारों द्वारा अपने मकान तोड़े जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें पहले मकान हटाने और बाद में बसाहट एवं मुआवजा दिए जाने की मौखिक बात कही जा रही है। इसे लेकर प्रभावित परिवारों में असमंजस और नाराजगी की स्थिति है।

मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल
प्रभावित परिवारों का कहना है कि प्रस्तावित बसाहट स्थल पर अभी सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हुई हैं। ऐसे में परिवारों को मकान खाली कर वहां रहने के लिए भेजे जाने पर उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक वैकल्पिक बसाहट स्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा दी जातीं, तब तक मकान खाली कराने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

उनका आग्रह है कि पहले पुनर्वास एवं बसाहट की व्यवस्था स्पष्ट की जाए और उसके बाद ही मकान हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

दशकों से चल रही प्रभावित परिवारों की परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार अलग-अलग चरणों में भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवार लंबे समय से पुनर्वास और बसाहट से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। अब मकान खाली कराने के दबाव के बीच उनकी मांग है कि एसईसीएल और प्रशासन प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लेकर बसाहट, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान करें।