बालकोनगर। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में सुरक्षा को केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित न रखते हुए कार्य संस्कृति और व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों, आगंतुकों और आसपास के समुदायों में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए कंपनी द्वारा नियमित प्रशिक्षण, व्यावहारिक गतिविधियों और सामुदायिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
इन पहलों का उद्देश्य कार्यस्थल पर ‘जीरो हार्म’ की संस्कृति को मजबूत करना और प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
27 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षा इंडक्शन
बालको में कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और आगंतुकों के लिए सुरक्षा इंडक्शन अनिवार्य किया गया है। प्रचालन क्षेत्र में प्रवेश से पहले उन्हें संभावित जोखिमों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और जरूरी नियमों की जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण के बाद सुरक्षा संबंधी आकलन भी किया जाता है।
कंपनी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 27 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षा इंडक्शन दिया जा चुका है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026 में 2.30 लाख से अधिक मैन-आवर्स का सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा किया गया।
सुरक्षा को व्यवहार का हिस्सा बनाने पर जोर
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सुरक्षा कंपनी में काम करने, नेतृत्व करने और रोजमर्रा के निर्णय लेने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ‘जीरो हार्म’ सभी की साझा जिम्मेदारी है और जागरूकता, जिम्मेदारी तथा एक-दूसरे की चिंता के माध्यम से सुरक्षा को व्यवहार का हिस्सा बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा संकल्प से लेकर सुरक्षा चौपाल तक पहल
बालको ने सुरक्षा प्रशिक्षण को नियमित गतिविधि से आगे बढ़ाकर कर्मचारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली से जोड़ने के लिए कई पहल शुरू की हैं। ‘सुरक्षा संकल्प’ के माध्यम से करीब पांच वर्षों से कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों को अलग-अलग विषयों पर सुरक्षा के बेहतर तरीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
वहीं ‘सुरक्षा स्टीवर्ड’ के तहत शॉप फ्लोर से चुने गए सुरक्षा चैंपियन अपने साथियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। ‘सुरक्षा पहल’ के जरिए सड़क सुरक्षा पर जागरूकता बढ़ाई जा रही है, जबकि ‘सुरक्षा ज्योति’ में सुपरवाइजरों को सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण देकर उनके नेतृत्व कौशल को मजबूत किया जाता है।
इसके अलावा ‘सुरक्षा प्रहरी’ और ‘सुरक्षा चौपाल’ जैसे संवादात्मक मंचों के माध्यम से वरिष्ठ प्रबंधन और सुपरवाइजर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों, विषयों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर सीधे संवाद करते हैं।
सेफ्टी पार्क में अनुभव से सीख रहे सुरक्षा के तरीके
इस वर्ष बालको ने ‘सेफ्टी पार्क’ की शुरुआत भी की है। यह अनुभव आधारित प्रशिक्षण केंद्र है, जहां मॉडल, व्यावहारिक मॉड्यूल और दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सुरक्षा नियमों और प्रक्रियाओं को समझाया जाता है। इससे प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को सुरक्षा उपायों को देखकर और व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिलता है।
ग्लोबल रोड सेफ्टी अवॉर्ड से भी सम्मान
सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बालको की पहलों को ग्लोबल रोड सेफ्टी अवॉर्ड 2026 से सम्मानित किए जाने की जानकारी कंपनी ने दी है। कंपनी के अनुसार यह सम्मान सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की पहचान है।
Editor – Niraj Jaiswal
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