मानिकपुर खदान के विस्तार पर जनसुनवाई पूरी, समर्थन के साथ विरोध के स्वर भी उठे

5.25 लाख से बढ़कर 7 लाख टन होगी वार्षिक उत्पादन क्षमता, प्रभावितों ने मुआवजा और रोजगार के मुद्दे पहले सुलझाने की मांग की

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) कोरबा क्षेत्र की मानिकपुर परियोजना के विस्तार को लेकर शुक्रवार को कल्याण मंडप में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो गई। परियोजना की वर्तमान 5.25 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 7 लाख टन प्रतिवर्ष करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय पर्यावरण विभाग के निर्देश पर आयोजित इस जनसुनवाई में परियोजना के विस्तार को लेकर लोगों ने अपनी-अपनी राय रखी। जहां कुछ लोगों ने विस्तार का समर्थन किया, वहीं परियोजना प्रभावितों सहित कुछ लोगों ने अपनी आपत्तियां और मांगें भी सामने रखीं।

जनसुनवाई के दौरान प्रशासन, पर्यावरण विभाग और एसईसीएल के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर देवेन्द्र पटेल, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी प्रसन्ना सोनकर सहित एसईसीएल के अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

नए कोयला भंडार से उत्पादन बढ़ाने की योजना
मानिकपुर कोरबा क्षेत्र की एकमात्र ओपन कास्ट माइंस है, जबकि क्षेत्र की अन्य खदानें भूमिगत हैं। बीते वर्षों में मानिकपुर खदान के एक हिस्से में कोयले का नया भंडार सामने आया है। इसी भंडार से उत्पादन करने के उद्देश्य से परियोजना विस्तार की योजना तैयार की गई है।

जनसुनवाई की शुरुआत में एसईसीएल प्रबंधन की ओर से परियोजना के विस्तार, प्रस्तावित कार्यक्षेत्र और पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई। प्रबंधन ने बताया कि वर्तमान में मानिकपुर परियोजना से प्रतिवर्ष 5.25 लाख टन कोयला उत्पादन किया जा रहा है।

परियोजना क्षेत्र में पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने के कारण प्रस्तावित विस्तार के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने की योजना है।

समर्थकों ने रोजगार और कारोबार बढ़ने की बात कही
जनसुनवाई में कई लोगों ने परियोजना विस्तार का समर्थन करते हुए कहा कि खनन गतिविधियों के विस्तार से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। लोगों का कहना था कि नए उद्योग और परियोजनाएं अपने साथ रोजगार के साथ-साथ व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी लेकर आती हैं। कोरबा में खनन गतिविधियों के कारण पहले भी रोजगार और व्यवसाय को बढ़ावा मिला है।

प्रभावितों ने मुआवजा और रोजगार का मुद्दा उठाया
दूसरी ओर, परियोजना प्रभावित लोगों ने कहा कि वे विकास और खदान विस्तार के विरोध में नहीं हैं, लेकिन मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े लंबित मामलों का समाधान पहले किया जाना चाहिए। प्रभावितों ने अपनी समस्याओं और मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखा।

जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न पक्षों की आपत्तियां, सुझाव और मांगें दर्ज कीं। अपर कलेक्टर देवेन्द्र पटेल ने बताया कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है और प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर आगे भेजी जाएगी।