गेवरा खदान में तेज बारिश का कहर, रेस्ट शेल्टर बहकर खदान की खाई में गिरा

करीब एक घंटे की बारिश में माइनिंग स्टाफ के लिए बना टिन शेड उखड़ा; हादसे के वक्त अंदर नहीं था कोई कर्मचारी

कोरबा।गेवरा कोयला खदान में तेज बारिश के दौरान माइनिंग स्टाफ के लिए बनाया गया रेस्ट शेल्टर पानी के तेज बहाव में बहकर खदान की गहरी खाई में जा गिरा। यह घटना गेवरा खदान के गणेश सर्कल के पास बताई जा रही है।

राहत की बात यह रही कि जिस समय शेल्टर बहा, उस दौरान उसमें कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

जानकारी के अनुसार बुधवार को गेवरा क्षेत्र में करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। बारिश के बाद खदान के ऊपरी हिस्से से निचले हिस्से की ओर पानी का तेज बहाव शुरू हो गया। इसी बहाव की चपेट में आकर कर्मचारियों के लिए बनाया गया टिन शेड वाला रेस्ट शेल्टर अपनी जगह से उखड़ गया और पानी के साथ बहता हुआ खदान की गहराई में जा गिरा।

शिफ्टिंग इंचार्ज से लेकर ओवरमैन तक करते थे उपयोग
बताया गया कि इस रेस्ट शेल्टर का उपयोग खदान में कार्यरत शिफ्टिंग इंचार्ज, माइनिंग सरदार और ओवरमैन करते थे। खदान के अंदर काम के दौरान धूप और बारिश से बचने के साथ कर्मचारियों के आराम के लिए भी यह स्थान इस्तेमाल होता था।

बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर शेल्टर बनाया गया था, वहां बारिश के पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। तेज बारिश के दौरान पानी का दबाव बढ़ने से पूरा स्ट्रक्चर अपनी जगह से उखड़ गया और बहकर खाई में जा गिरा।

वीडियो में दिखा पानी के बहाव में बहता शेल्टर

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेज बहाव के साथ रेस्ट शेल्टर के बहने और खदान की गहराई में गिरने का दृश्य दिखाई दे रहा है। घटना के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहा है।

कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने खदान क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए बनाए गए अस्थायी स्ट्रक्चर और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खदान जैसे संवेदनशील कार्यस्थल पर तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव का आकलन और सुरक्षित जल निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

गनीमत रही कि हादसे के समय रेस्ट शेल्टर में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। यदि उस समय कर्मचारी वहां होते तो गंभीर जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

घटना के बाद अब प्रभावित स्थल की सुरक्षा व्यवस्था और जल निकासी की स्थिति की जांच की आवश्यकता सामने आई है।