कोतवाली को मिलेगा नया भवन, ई-मालखाने का भी होगा शुभारंभ

आज दोपहर 2 बजे मंत्री लखनलाल देवांगन करेंगे वर्चुअल लोकार्पण,आईजी रामगोपाल गर्ग के कोरबा प्रवास की संभावना

कोरबा। शहर के सिटी कोतवाली परिसर में लंबे समय से निर्माणाधीन नवीन थाना भवन अब लोकार्पण के लिए तैयार है। गुरुवार को दोपहर 2 बजे कोरबा विधायक एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन नवीन थाना भवन का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे। इसी अवसर पर थाना परिसर में आधुनिक ई-मालखाने का भी उद्घाटन किया जाएगा।

कार्यक्रम को लेकर पुलिस विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग के भी कोरबा प्रवास की संभावना है।

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। नवीन भवन के साथ ई-मालखाने की सुविधा शुरू होने से जब्त सामग्री के व्यवस्थित रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन में तकनीकी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

प्रभार संभालते ही थाना प्रभारी ने शुरू कराया शेष काम
सिटी कोतवाली में थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ एसआई प्रेमचंद साहू ने प्रभार संभालने के बाद निर्माणाधीन नवीन थाना भवन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित ठेकेदार से संपर्क कर भवन के शेष कार्यों को शीघ्र पूरा कराने के लिए चर्चा की और आवश्यक समन्वय किया।

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में शेष कार्यों को पूरा कर भवन को लोकार्पण के लिए तैयार कराया गया।

पुराने मालखाने की जगह अब ई-मालखाने की आधुनिक व्यवस्था

वर्तमान कोतवाली भवन में लंबे समय से पारंपरिक व्यवस्था के तहत मालखाना संचालित हो रहा था। पुलिस विभाग में तकनीक आधारित व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ जब्त सामान और केस प्रॉपर्टी के सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखरखाव की आवश्यकता बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए थाना भवन में ई-मालखाने के लिए विस्तारित व्यवस्था की गई है।

नई व्यवस्था से जब्त सामग्रियों के रिकॉर्ड और रखरखाव को अधिक व्यवस्थित एवं तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।

पुराने खपरैल भवन से नए थाना भवन तक का सफर

सिटी कोतवाली परिसर में आज भी एक पुराना खपरैल भवन मौजूद है। बताया जाता है कि यह भवन ब्रिटिश काल की पुलिस व्यवस्था की याद दिलाता है। समय के साथ कोरबा के विस्तार और आबादी बढ़ने के अनुरूप थाना भवन और पुलिस व्यवस्था में भी बदलाव होते गए। अब उसी परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नवीन थाना भवन आकार ले चुका है।

जमींदारी दौर से पुलिस व्यवस्था का केंद्र रहा कोतवाली

कोरबा के पृथक जिला बनने से पहले यह क्षेत्र बिलासपुर जिले के प्रशासनिक दायरे में था। जमींदारी व्यवस्था के दौर में स्थानीय कानून-व्यवस्था में जमींदार और उनके सुरक्षा कर्मियों के साथ कोटवारों की भी भूमिका रहती थी। ब्रिटिश काल में ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पुलिस चौकियों और थानों का विस्तार किया गया। इसी दौर में कोरबा क्षेत्र में भी पुलिस व्यवस्था की शुरुआती संरचना विकसित हुई, जो आगे चलकर थाना और फिर सिटी कोतवाली के रूप में विस्तारित हुई।

औद्योगिक विकास के साथ बढ़ी पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी

1950 से 1980 के दशक के बीच कोरबा में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ शहर की आबादी तेजी से बढ़ी। बालको और कोयला खदानों सहित औद्योगिक संस्थानों के विकास के साथ बड़ी संख्या में कामगार और अन्य लोग कोरबा पहुंचे। इसके साथ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी बढ़ती गई और पुलिस व्यवस्था को विस्तार मिला।

25 मई 1998 को कोरबा के पृथक जिला बनने के बाद जिला मुख्यालय की पुलिस व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए। मुख्य थाने को सिटी कोतवाली के रूप में विकसित किया गया। समय-समय पर यहां पदस्थ थाना प्रभारियों द्वारा भवन और व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार कराए जाते रहे।

कई पीढ़ियों की पुलिस सेवा का गवाह रहा परिसर

सिटी कोतवाली का यह परिसर कोरबा की पुलिस व्यवस्था के लंबे सफर का साक्षी रहा है। जिले के कई अधिकारी और पुलिसकर्मी यहां लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में पुराने भवन से आधुनिक थाना भवन तक का यह बदलाव पुलिस विभाग के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

जमींदारी दौर की पुलिस चौकी से लेकर आधुनिक ई-मालखाने से सुसज्जित नए सिटी कोतवाली भवन तक का यह सफर कोरबा के बदलते स्वरूप और बढ़ती जरूरतों के साथ पुलिस व्यवस्था के विकास को भी दर्शाता है।