बायोफ्लॉक ने बदली अजीत की जिंदगी, मछली पालन से 1.08 लाख की मासिक आमदनी

पहले खेती-मजदूरी से चलता था परिवार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली मदद तो आधुनिक तकनीक से शुरू किया कारोबार

कोरबा।कभी पारंपरिक खेती और मजदूरी पर निर्भर अजीत सिंह सुमन ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर अपनी आमदनी का नया रास्ता तैयार किया। कटघोरा विकासखंड के नेहरूनगर-छिर्रा निवासी अजीत ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन शुरू किया। अब वे इससे करीब 1 लाख 8 हजार रुपए प्रतिमाह आय अर्जित कर रहे हैं।

योजना से मिली मदद, शुरू हुआ नया सफर
अजीत के सामने पहले रोजगार के सीमित विकल्प थे। खेती और मजदूरी से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसी दौरान मत्स्य पालन विभाग से उन्हें बायोफ्लॉक तकनीक की जानकारी मिली। विभागीय मार्गदर्शन में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आवेदन किया।

वर्ष 2024-25 में उन्हें बायोफ्लॉक तालाब निर्माण और तारपौलिन लाइनर के लिए शासकीय सहायता मिली। इसके बाद उन्होंने आधुनिक तरीके से मछली पालन शुरू किया। कम जगह और सीमित पानी में मत्स्य पालन की सुविधा ने उनके लिए रोजगार का नया अवसर खोल दिया।

आमदनी बढ़ी तो मजबूत हुआ परिवार
मछली पालन शुरू होने के बाद अजीत की आय में बदलाव आया। वर्तमान में वे करीब 1.08 लाख रुपए प्रतिमाह आय अर्जित कर रहे हैं। बढ़ी आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में भी सुधार आया। सफलता के बाद क्षेत्र में उनकी पहचान प्रगतिशील किसान के रूप में बनी है।

अजीत सिंह सुमन बताते हैं कि बायोफ्लॉक तकनीक उनके परिवार के लिए आय का मजबूत साधन बनी है। विभागीय मार्गदर्शन और योजना से मिली सहायता ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।

खेती-मजदूरी से बायोफ्लॉक तक का यह सफर दिखाता है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी सहायता का सही उपयोग ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकता है।