संस्कारयुक्त शिक्षा से ही होगा व्यक्तित्व का समग्र विकास : टेकराम यादव

कोरबा। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल अकादमिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, व्यवहारिक ज्ञान और संस्कारों का समावेश भी आवश्यक है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ शिक्षक एवं गायत्री परिवार के सक्रिय सदस्य टेकराम यादव ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता या रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे संस्कारों से युक्त जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ यदि मानवीय संवेदनाएं, अनुशासन, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारियों का बोध नहीं जुड़ता, तो वह अधूरी रह जाती है। संस्कारयुक्त विद्यार्थी परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से निभाने के साथ जीवन की चुनौतियों का भी सकारात्मक रूप से सामना करते हैं।

टेकराम यादव ने कहा कि मोबाइल, सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली के दौर में बच्चों का ध्यान मूल्यों से भटकने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में माता-पिता, शिक्षक और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सहयोग, सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे जीवन मूल्यों से जोड़ें।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब उसके साथ संस्कारों का समावेश हो। इससे विद्यार्थियों का व्यक्तित्व संतुलित, संवेदनशील और जिम्मेदार बनेगा तथा वे समाज और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे।