कोरबा। जिले के लोतलोता क्षेत्र में हसदेव ताप विद्युत परियोजना (सीएसईबी) द्वारा फ्लाई ऐश डंपिंग शुरू करने की तैयारी उस समय विवादों में घिर गई, जब जमीन अधिग्रहण से प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर कार्य रुकवा दिया। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, हसदेव ताप विद्युत परियोजना के विस्तार के बाद प्रतिदिन निकलने वाली फ्लाई ऐश के सुरक्षित भंडारण के लिए लोतलोता स्थित पुराने फ्लाई ऐश पॉन्ड का सीमित अवधि के लिए दोबारा उपयोग किए जाने की योजना बनाई गई है। प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद परियोजना के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडेय अधिकारियों एवं सुरक्षा कर्मियों के साथ स्थल पर कार्य प्रारंभ कराने पहुंचे थे।
अधिकारियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रभावित परिवार मौके पर एकत्र हो गए।
ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 1989 में उनकी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। उस समय उन्हें उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कई परिवार इन दोनों सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग का कार्य किसी भी कीमत पर शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
उनका आरोप है कि वर्षों से वे न्याय की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।
वहीं परियोजना प्रबंधन का कहना है कि फ्लाई ऐश डंपिंग के लिए उन्हें प्रशासन से तीन माह की विधिवत अनुमति प्राप्त है और विद्युत उत्पादन से जुड़े आवश्यक कार्यों को जनहित में पूरा किया जाना जरूरी है।
दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को फिलहाल शांत कराया गया, लेकिन क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
अब लोगों की निगाह प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि प्रभावित परिवारों की वर्षों पुरानी मांगों का समाधान कैसे किया जाएगा और फ्लाई ऐश डंपिंग कार्य कब शुरू हो सकेगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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