वेतन समझौते में देरी पर फूटा कोयला श्रमिकों का आक्रोश, कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव

JBCCI-12 के गठन की मांग को लेकर संयुक्त मोर्चे का प्रदर्शन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कोरबा। 12वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते (JBCCI-12) के गठन में हो रही देरी के विरोध में एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में मंगलवार को कोयला श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। एटक, एचएमएस, इंटक और सीटू के संयुक्त मोर्चे के राष्ट्रीय आह्वान पर आयोजित ‘मांग दिवस’ के तहत सैकड़ों श्रमिकों ने कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्र होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और शीघ्र वेतन समझौता लागू करने की मांग उठाई।

सुबह 10 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन में विभिन्न खदानों और इकाइयों के श्रमिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। महाप्रबंधक कार्यालय परिसर श्रमिक एकता और अधिकारों के समर्थन में लगाए गए नारों से गूंजता रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कोयला कर्मचारी देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, इसके बावजूद उनके नए वेतन समझौते को लेकर प्रबंधन गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

प्रबंधन की टालमटोल नीति पर जताई नाराजगी
संयुक्त मोर्चे के नेताओं ने कहा कि कोल इंडिया के कर्मचारियों का नया वेतन समझौता लंबे समय से लंबित है। बार-बार मांग उठाने के बावजूद JBCCI-12 के गठन और वार्ता प्रक्रिया में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। इससे श्रमिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते वार्ता प्रक्रिया शुरू नहीं की गई और श्रमिक हितों की अनदेखी जारी रही, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद संयुक्त मोर्चे के बैनर तले एक आक्रोश रैली निकाली गई, जो प्रशासनिक भवन तक पहुंची। यहां प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय महाप्रबंधक को कोल इंडिया चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वेतन समझौते की प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ करने तथा कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई।

प्रदर्शन में एटक, एचएमएस, सीटू और इंटक से जुड़े पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और श्रमिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। विभिन्न समितियों और शाखाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए श्रमिक एकजुटता का प्रदर्शन किया।

संयुक्त मोर्चे ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।