कोयला खदानों में चोरी रोकने सीआईएसएफ होगी और सशक्त

पुलिस पर निर्भरता घटाने की तैयारी, त्रिपुरा राइफल्स की तैनाती भी हो सकती है समाप्त

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कोयला खदानों में लगातार हो रही डीजल, स्क्रैप और कोयला चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को अधिक अधिकार देने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद चोरी और आपराधिक गतिविधियों के मामलों में पुलिस पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।

जानकारी के अनुसार कोरबा जिले के गेवरा, दीपका, कुसमुंडा और कोरबा क्षेत्र की खदानों में लंबे समय से संगठित गिरोहों द्वारा चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं।

इन घटनाओं से एसईसीएल को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में कुछ खदानों की सुरक्षा सीआईएसएफ और कुछ की सुरक्षा त्रिपुरा राइफल्स के जिम्मे है।

सूत्रों के मुताबिक अब तक खदानों में चोरी या अन्य आपराधिक गतिविधियों में पकड़े गए आरोपियों को सीआईएसएफ द्वारा पुलिस के हवाले किया जाता था और आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस करती थी। लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

नई कार्ययोजना के तहत सीआईएसएफ को अधिक सक्रिय और सक्षम भूमिका देने की तैयारी है, ताकि वह खदान क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों पर त्वरित नियंत्रण स्थापित कर सके और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। इस संबंध में जल्द ही विस्तृत रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है।

दो माह में त्रिपुरा राइफल्स की हो सकती है विदाई
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि आगामी दो महीनों के भीतर कई खदान क्षेत्रों से त्रिपुरा राइफल्स की तैनाती समाप्त की जा सकती है। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी सीआईएसएफ के हाथों में होगी। इससे खदानों में सुरक्षा प्रबंधन अधिक केंद्रीकृत और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोयला खदानों में संगठित चोरी, अवैध गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर बेहतर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा, जिससे एसईसीएल की संपत्तियों की सुरक्षा और उत्पादन गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।