करंट से मजदूर की मौत का सच दफन नहीं हो सका, 6 दिन बाद कब्र से निकाला गया शव

बिना पोस्टमार्टम शव सौंपने का आरोप, पत्नी की शिकायत पर शुरू हुई जांच; बिजली और सुरक्षा लापरवाही आई सामने

कोरबा-पाली। पाली थाना क्षेत्र के ग्राम नगोई में छत ढलाई के दौरान करंट लगने से एक मजदूर की मौत का मामला अब गंभीर जांच का विषय बन गया है। घटना के छह दिन बाद मृतक की पत्नी की शिकायत पर कब्र से शव निकालकर परीक्षण कराया गया। प्रारंभिक जांच में करंट लगने के स्पष्ट संकेत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम पोड़ी मड़वामौहा निवासी नवीन कुमार (28 वर्ष) ग्राम नगोई में एक मकान की छत ढलाई के कार्य में मजदूरी कर रहा था। इसी दौरान लिफ्ट मशीन बिजली तार की चपेट में आ गई, जिससे वह करंट की चपेट में आ गया। गंभीर हालत में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बिना पुलिस को सूचना दिए और बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव उन्हें सौंप दिया। इतना ही नहीं, परिजनों को यह बताया गया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद 16 जून को सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बाद में करंट लगने से मौत की जानकारी मिलने पर मृतक की पत्नी ने 19 जून को पाली थाना में आवेदन देकर पोस्टमार्टम और निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उच्चाधिकारियों की अनुमति से शव को कब्र से निकलवाकर परीक्षण कराया।

नायब तहसीलदार सुजीत पाटले, फोरेंसिक विशेषज्ञ सत्यजीत सिंह कोसरिया, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम की मौजूदगी में शव परीक्षण किया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञ ने बताया कि प्रथम दृष्टया हाथ से करंट प्रवेश और पैर से करंट निकलने के साक्ष्य मिले हैं। शरीर पर करंट के निशान भी पाए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए संरक्षित किया गया है।

जांच में सामने आई कई गंभीर लापरवाहियां
घटनास्थल के निरीक्षण में पाया गया कि मकान में विद्युत कनेक्शन नियमों के अनुरूप नहीं था। बिजली का कनेक्शन सीधे विद्युत बॉक्स से न लेकर लूपिंग के माध्यम से किया गया था और कई जगह तार खुले हुए थे। इसके अलावा निर्माण कार्य शुरू होने से पहले बिजली विभाग को सूचना भी नहीं दी गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदार द्वारा मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी ही हादसे का प्रमुख कारण बन सकती है।

डॉक्टरों की भूमिका पर उठे सवाल
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें गुमराह किया गया और कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए। अब यह जांच का विषय है कि बिना पोस्टमार्टम शव परिजनों को क्यों सौंपा गया और इसमें किसकी लापरवाही रही।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
नवीन कुमार के परिवार पर यह दूसरा बड़ा आघात है। परिजनों के अनुसार तीन महीने पहले फरवरी में सड़क दुर्घटना में उनके छोटे बेटे शनि कुमार की मौत हो गई थी। अब बड़े बेटे नवीन की असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। नवीन अपने पीछे पत्नी, तीन वर्ष की बेटी और तीन माह की मासूम बच्ची को छोड़ गया है।

फिलहाल प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी।