कुसमुंडा खदान में भारी वाहन की चपेट में आने से ग्रामीण की मौत, मुआवजे की मांग पर प्रदर्शन

कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में मंगलवार देर शाम सतर्कता चौक के पास तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से जपेली निवासी बहारता उर्फ दीवान दास (48) की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद शव को कुसमुंडा अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। घटना की जानकारी बुधवार सुबह क्षेत्र में फैलते ही ग्रामीणों और श्रमिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त हो गया।

हादसे के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों, श्रमिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही के कारण लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। उन्होंने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और आश्रितों को रोजगार देने की मांग की।

प्रबंधन से लंबी वार्ता के बाद बनी सहमति
प्रदर्शन बढ़ने के बाद एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से चर्चा की। लंबी वार्ता के बाद प्रबंधन की ओर से मृतक के परिवार के पांच सदस्यों को रोजगार देने, तत्काल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा दुर्घटना बीमा सहित नियमानुसार मिलने वाले मुआवजे और अन्य लाभ प्रदान करने का आश्वासन दिया गया।

एसईसीएल अधिकारियों के लिखित एवं मौखिक आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन स्थगित कर दिया।

कुसमुंडा थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे की परिस्थितियों और भारी वाहन चालक की भूमिका समेत संभावित लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही है।

धरना-प्रदर्शन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल, जिला संयोजक अतुल दास महंत, श्रम सेवा भू-स्थापित कामगार संगठन के संस्थापक अशोक पटेल, कुसमुंडा खदान अध्यक्ष कैलाश साहू, पीड़ित परिवार के सदस्य पवन दास महंत सहित आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रमिक शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और हादसों पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो भविष्य में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।