रिकॉर्ड उत्पादन के बाद दीपका ओसीपी अब 60 मिलियन टन क्षमता विस्तार की तैयारी

40 मिलियन टन की पर्यावरणीय स्वीकृति के बाद विस्तार कार्य तेज, उत्पादन-प्रेषण और लाभ में कायम कीर्तिमान

कोरबा। एसईसीएल की मेगा परियोजना दीपका ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (ओसीपी) ने उत्पादन, कोयला प्रेषण और लाभ के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए देश की प्रमुख कोयला परियोजनाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। 40 मिलियन टन प्रतिवर्ष की पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद अब परियोजना को चरणबद्ध तरीके से 60 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता तक विकसित करने की तैयारी तेज कर दी गई है।

वर्ष 1992 में करीब 10 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ शुरू हुई दीपका परियोजना वर्तमान में 37.5 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता तक पहुंच चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 375 लाख टन कोयला उत्पादन तथा 394.3 लाख टन कोयला प्रेषण कर नया रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि के साथ दीपका ओसीपी एसईसीएल की सर्वाधिक उत्पादक परियोजनाओं में शामिल हो गई है।

चालू वित्तीय वर्ष में भी प्रदर्शन शानदार
वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी दीपका परियोजना का प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है। 25 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार परियोजना ने 126.6 लाख टन कोयला उत्पादन कर निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत हासिल किया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 30.5 प्रतिशत अधिक है।

इसी अवधि में परियोजना ने 138.7 लाख टन कोयला डिस्पैच किया, जो निर्धारित लक्ष्य का 109 प्रतिशत है। उत्पादन के साथ-साथ प्रेषण व्यवस्था में बेहतर समन्वय को इस उपलब्धि का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

3,230 करोड़ से अधिक का लाभ
दीपका ओसीपी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3,230.91 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। परियोजना का प्रति टन लाभ बढ़कर करीब 827 रुपये रहा। लागत नियंत्रण, आधुनिक तकनीक और बेहतर परिचालन दक्षता के चलते दीपका एसईसीएल की सर्वाधिक लाभ अर्जित करने वाली परियोजनाओं में शामिल है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादन क्षमता
परियोजना में उत्पादन एवं कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और उच्च क्षमता वाली मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें 42 क्यूबिक मीटर क्षमता के इलेक्ट्रिक रोप शॉवेल, हाई कैपेसिटी सरफेस माइनर, इन-पिट बेल्ट कन्वेयर सिस्टम, एफएमसी एवं एमजीआर साइलो, ड्रोन आधारित निगरानी तथा डिजिटल माइन मैनेजमेंट सिस्टम प्रमुख हैं।

भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास पर भी जोर
विस्तार योजना के साथ भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया को भी गति दी जा रही है। मालगांव क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण तथा हरदीबाजार क्षेत्र के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है। एसईसीएल की ओर से विकसित पुनर्वास कॉलोनी में सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए कई उपाय
उत्पादन विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना में सतत वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली, वाटर स्प्रिंकलर, व्हील वॉशिंग सिस्टम, वृक्षारोपण, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग, प्लास्टिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण और डिजिटल पर्यावरण निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

एसईसीएल प्रबंधन के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति, आधुनिक मशीनरी, मजबूत परिवहन व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर दीपका ओसीपी को आने वाले वर्षों में 60 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता वाली आधुनिक एवं विश्वस्तरीय कोयला परियोजना के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे एसईसीएल की उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में भी परियोजना की भूमिका और महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।