कोरबा। खरीफ सीजन में किसानों को प्राकृतिक एवं उन्नत खेती की तकनीकों से जोड़ने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में नवागांव कला में आयोजित कार्यक्रम में कृषि सखी ने किसानों को घन जीवामृत तैयार करने की विधि और उसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों ने घन जीवामृत की उपयोगिता को समझा और इसे अपने खेतों में अपनाने की सहमति जताई। कृषि सखी ने बताया कि घन जीवामृत प्राकृतिक खेती का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उसकी उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में सुधार करता है। इसके नियमित उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
उप संचालक कृषि देवेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कोरबा जिले में खरीफ मौसम की प्रमुख फसल धान है, जिसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। इसके अलावा रबी एवं बागवानी फसलों का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती की पद्धतियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि घन जीवामृत जैसी जैविक तकनीकें मृदा स्वास्थ्य सुधारने, पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे खेती की लागत घटती है और किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है।
घन जीवामृत के प्रमुख लाभ
मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि
लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है
फसलों की उत्पादकता में सुधार
खेती की लागत घटती है
पर्यावरण संरक्षण को मिलता है बढ़ावा
कृषि विभाग द्वारा खरीफ सीजन के दौरान जिलेभर में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के लिए जागरूकता कार्यक्रम लगातार संचालित किए जा रहे हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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