कोयला धूल से त्रस्त ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, रेलवे फाटक पर चक्काजाम

कोरबा। सुराकछार रेलवे साइडिंग से उड़ रही कोयले की धूल के खिलाफ वार्ड क्रमांक 65 प्रेमनगर सहित आसपास के पांच गांवों के ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान ग्रामीणों ने पार्षद प्रेम कुमार साहू के नेतृत्व में पंखा दफाई रेलवे फाटक पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सुराकछार भूमिगत खदान की रेलवे साइडिंग पर प्रतिदिन भारी मात्रा में कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग होती है, लेकिन धूल नियंत्रण के लिए पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं किया जाता। इसके कारण पंखा दफाई, भेरोताल, सुराकछार, प्रेमनगर सहित आसपास के क्षेत्रों में कोल डस्ट फैल रही है, जिससे दमा, खांसी, सांस और आंखों से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।

पार्षद प्रेम कुमार साहू ने बताया कि इस समस्या को लेकर पूर्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर साइडिंग बंद करने अथवा प्रभावी धूल नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

धरना स्थल पर जुटे ग्रामीणों ने “धूल मुक्त गांव, स्वस्थ जीवन” के नारे लगाए और कहा कि कोयले की धूल ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। लोगों का कहना है कि घरों की छतें, कपड़े और खाने-पीने की वस्तुएं तक काली हो जाती हैं, वहीं स्कूली बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि साइडिंग पर 24 घंटे वाटर स्प्रिंकलर, मिस्ट गन और फॉग कैनन की व्यवस्था की जाए, कोयला लोडिंग के लिए वैकल्पिक समाधान निकाला जाए तथा प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

चक्काजाम की सूचना मिलते ही कुसमुंडा थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से चर्चा की। प्रशासन ने एसईसीएल प्रबंधन से बातचीत का आश्वासन दिया है, लेकिन फिलहाल ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार कोयले की धूल में मौजूद सूक्ष्म कण लंबे समय तक शरीर में पहुंचने पर फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जिससे यह समस्या केवल प्रदूषण नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गई है।