कोल ब्लॉक के लिए ग्राम सभा आदेश का ग्रामीणों ने किया विरोध

जल, जंगल और जमीन बचाने की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कोरबा। जिले में प्रस्तावित रजगामार डीप साइड कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कोरकोमा और केरवां सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित करने संबंधी प्रशासनिक आदेश का विरोध करते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला उत्खनन से क्षेत्र की जल, जंगल और जमीन पर गंभीर असर पड़ेगा।

सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण, सरपंचों के नेतृत्व में कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और कलेक्टर व अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि कामर्शियल माइनिंग के तहत आवंटित रजगामार डीप साइड फुलकडीह नाला कोल ब्लॉक के लिए एफएआर प्रमाण-पत्र जारी करने ग्राम सभाएं आयोजित करने का आदेश जारी किया गया है, जिसे तत्काल वापस लिया जाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक से कोरकोमा, केरवां, केराकछार, रजगामार और ढेंगूरडीह जैसे गांव प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि भूमिगत खनन से जलस्तर में गिरावट आएगी, जंगलों का नुकसान होगा तथा पारंपरिक देवस्थल और सांस्कृतिक पहचान पर भी खतरा मंडराएगा। साथ ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी सहमति के बिना आगे की प्रक्रिया बढ़ाई गई तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और ग्रामीणों के जीवनाधार से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कामर्शियल माइनिंग के तहत मेसर्स मिवान स्टील लिमिटेड को रजगामार डीप साइड कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है। लगभग 636.82 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस ब्लॉक में करीब 72.46 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता के कोयले का भंडार होने का अनुमान है।

परियोजना प्रारंभ करने से पूर्व आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ग्राम सभाओं का आयोजन प्रस्तावित है।