लेमरू के जंगलों में हरे पेड़ों की कटाई, ग्रामीणों ने पकड़ी लकड़ी तस्करी

12 दिनों तक चलता रहा खेल, दो वाहन और लकड़ी जब्त

कोरबा। जिले के लेमरू वन परिक्षेत्र अंतर्गत लामपहाड़- बड़गांव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की सक्रियता से इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा हुआ, जिसके बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो वाहनों और लकड़ियों को जब्त किया।

जानकारी के अनुसार कक्ष क्रमांक पी-862 में पिछले करीब 12 दिनों से मशीनों के जरिए पेड़ों की कटाई की जा रही थी। ग्रामीणों को पहले लगा कि यह कार्य वन विभाग की अनुमति से हो रहा होगा, लेकिन बाद में लकड़ी ढुलाई में लगे ट्रैक्टरों और भारी वाहनों की जानकारी मिलने पर मामला संदिग्ध लगा। ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो जंगल में बड़ी मात्रा में लकड़ी कटाई और परिवहन का काम चलता मिला।

ग्रामीणों ने बताया कि मौके पर मौजूद वाहन चालकों ने लेमरू निवासी राजू खान के कहने पर लकड़ी लोड करने की बात कही। जब ग्रामीणों ने राजू खान से चर्चा की तो उसने लकड़ी रायपुर भेजने की बात कही और किसी अनुमति की जरूरत नहीं होने का दावा किया। वहीं ग्राम पंचायत सरपंच ओकेश्वर पैकरा ने किसी प्रकार की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। वाहन चालकों से कागजात मांगने पर वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग का मैदानी अमला पूरे मामले से अनजान बना रहा। बीटगार्ड से पूछने पर उसने क्षेत्र में ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी नहीं होने की बात कही। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों के दबाव के बाद वन अमला हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।

वन विभाग के अनुसार 27 मई की रात संयुक्त कार्रवाई में ट्रैक्टर और छह चक्का मालवाहन क्रमांक सीजी 11 बीएन 8798 को लकड़ी परिवहन करते पकड़ा गया। मौके से सेमल की लकड़ियां बरामद कर दोनों वाहनों सहित जब्त कर लेमरू रेंज कार्यालय लाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के भीतर पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों को पहले ट्रैक्टर से घाटी मार्ग तक लाया जाता था और फिर बड़े वाहनों में भरकर बाहर भेजा जाता था। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि वन विभाग इस मामले में किन लोगों को आरोपी बनाता है और जांच कितनी निष्पक्ष होती है।