पानी के अभाव में बेकार साबित हो रही कोरबा रेलवे की पिटलाइन

13 साल बाद भी नहीं बनी स्थायी जल व्यवस्था, ट्रेनों के रखरखाव और नई ट्रेनों के संचालन पर असर

कोरबा। कोरबा रेलवे स्टेशन पर यात्री ट्रेनों के रखरखाव और लंबी दूरी की नई ट्रेनों के संचालन की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से जनवरी 2013 में बनाई गई पिटलाइन पानी की कमी के कारण अपनी पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रही है। पिटलाइन में ट्रेनों की वाशिंग और वाटरिंग के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से इसका उपयोग सीमित रह गया है।

जानकारी के अनुसार पिटलाइन शुरू होने के शुरुआती दौर में बोर के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन कुछ समय बाद बोर सूख गया। इसके बाद पंप हाउस और जलापूर्ति व्यवस्था भी बंद हो गई। स्थायी जलस्रोत नहीं होने के कारण पिटलाइन में ट्रेनों की वाशिंग और वाटरिंग की सुविधा प्रभावित हो रही है।

प्राथमिक रखरखाव में बनी बाधा
पिटलाइन में पानी की व्यवस्था नहीं होने का सीधा असर कोरबा से ट्रेनों के प्राथमिक रखरखाव पर पड़ रहा है। वर्तमान में हसदेव एक्सप्रेस का प्राथमिक रखरखाव दुर्ग में किया जा रहा है। रेल संघर्ष समिति के सदस्यों ने हाल में बिलासपुर में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक राकेश रंजन से मुलाकात कर हसदेव एक्सप्रेस का प्राथमिक रखरखाव कोरबा में शुरू कराने का प्रस्ताव रखा था।

बताया गया कि पिटलाइन में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल कोरबा में प्राथमिक रखरखाव संभव नहीं है। यदि पिटलाइन में स्थायी जल व्यवस्था हो जाती है तो कोरबा स्टेशन पर ट्रेनों के रखरखाव की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन की उम्मीदों पर असर
कोरबा में पिटलाइन का निर्माण हुए 13 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक स्थायी जल व्यवस्था नहीं हो सकी है। रेल यात्रियों और स्थानीय संगठनों का मानना है कि पिटलाइन का बेहतर उपयोग होने से कोरबा से लंबी दूरी की नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

वर्तमान में कोरबा स्टेशन पर कोचुवेली सुपरफास्ट एक्सप्रेस के रैक को यात्रा के बाद पिटलाइन में रखा जाता है और रखरखाव से जुड़े कुछ कार्य किए जाते हैं। हालांकि ट्रेन का प्राथमिक रखरखाव कोचुवेली में ही होता है। पानी की स्थायी उपलब्धता नहीं होने से कोरबा की पिटलाइन में पूर्ण रखरखाव की सुविधा विकसित नहीं हो सकी है।

स्थानीय रेल संगठनों का कहना है कि पिटलाइन की मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त कर स्थायी जल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि इसका उपयोग पूरी क्षमता से हो सके और कोरबा से नई एवं लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन का रास्ता आसान हो।