एसईसीएल की कार्रवाई पर ग्रामीणों का आक्रोश, बोले- पहले मुआवजा और बसाहट, फिर तोड़ें मकान

हरदीबाजार के शांतिनगर में मकान तोड़ने की सूचना पर पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने किया विरोध

कोरबा।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के दीपका क्षेत्र अंतर्गत हरदीबाजार में मकान तोड़े जाने को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आक्रोश सामने आया है। मंगलवार को शांतिनगर में एक मकान तोड़ने का काम शुरू होने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई का विरोध किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि दीपका प्रबंधन की नीतियों के चलते मकान मालिक अपने मकान तोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उनका कहना है कि पहले मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके विपरीत कार्रवाई की जा रही है।

सेवानिवृत्त कर्मचारी के मकान को लेकर विवाद
जानकारी के अनुसार शांतिनगर निवासी सेवानिवृत्त एसईसीएल कर्मचारी चित्रेश साहू का दो मंजिला मकान है। उन्होंने मकान तोड़ने का ठेका दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ दिन पहले सरपंच और मोहल्लेवासियों ने गांव के हित में उनसे कुछ माह तक मकान नहीं तोड़ने का आग्रह किया था। इसके बावजूद दो दिन बाद मकान तोड़ने का काम फिर शुरू होने पर ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।

मुआवजा और पुनर्वास की शर्त पूरी करने की मांग
हरदीबाजार सरपंच लोकेश्वर कंवर ने कहा कि एसईसीएल प्रबंधन को पहले ग्रामवासियों की मांगों और लंबित मुद्दों को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सर्वसुविधायुक्त पुनर्वास स्थल, रोजगार, मुआवजा कटौती तथा मकान तोड़े जाने से पहले 50 प्रतिशत मुआवजा राशि के भुगतान की मांग की।

उन्होंने वर्ष 2004 में अधिग्रहण के समय लागू नीति तथा हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार एक डिसमिल जमीन पर नौकरी देने के मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

ग्रामीण अनिल टंडन ने कहा कि पूर्व में हुई त्रिपक्षीय वार्ता में ग्रामीणों के समक्ष स्पष्ट किया गया था कि जब तक पुनर्वास स्थल को सर्वसुविधायुक्त नहीं बनाया जाता और मकान तोड़ने से पहले 50 प्रतिशत मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक किसी ग्रामीण के मकान की एक ईंट तक नहीं निकाली जाएगी।

ग्रामीणों ने कहा कि पहले पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का समाधान किया जाए। इसके बाद ही मकान तोड़ने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सहमति और जमीनी कार्रवाई में अंतर दिखाई दे रहा है, जिसके कारण प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ रही है।