रोजगार और पुनर्वास की मांग पर उग्र प्रदर्शन, प्रबंधन के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
कोरबा-कुसमुंडा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र में भूविस्थापितों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 8 बजे से भूविस्थापितों ने खदान में कोयला खनन और परिवहन कार्य में लगी मशीनों को रोक दिया। पांच घंटे तक चले चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन के बाद प्रबंधन द्वारा मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
भूविस्थापितों ने प्रबंधन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें अर्जन के बाद जन्मे परिवार के सदस्यों के लिए रोजगार व पुनर्वास नीति, लंबित प्रकरणों का तत्काल निपटारा, अवैध कब्जों पर कार्रवाई और आउटसोर्सिंग कार्यों में स्थानीय भूविस्थापितों को प्राथमिकता शामिल हैं।


प्रबंधन का आश्वासन
आंदोलन की उग्रता को देखते हुए कुसमुंडा प्रबंधन ने भूविस्थापितों से वार्ता की। प्रबंधन ने मांगों को जायज मानते हुए निम्नलिखित आश्वासन दिए:
पांच दिनों के अंदर CMD (बिलासपुर) स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर नीतिगत समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाएगा।
आउटसोर्सिंग कंपनियों में 15 भूविस्थापितों को तत्काल रोजगार दिया जाएगा। एक सप्ताह के अंदर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
आंदोलन का नेतृत्व कर रही गोमती केवट ने कहा, “यह हमारे हक की लड़ाई है। प्रबंधन ने पांच दिनों में CMD स्तर की बैठक और 15 लोगों को रोजगार देने का भरोसा दिया है।
यदि समयसीमा में वादे पूरे नहीं हुए तो आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।”
प्रबंधन के ठोस आश्वासन के बाद दोपहर 1 बजे भूविस्थापितों ने खदान का कार्य सुचारू रूप से चलने दिया और धरना समाप्त कर दिया।
Editor – Niraj Jaiswal
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