राशन व्यवस्था चरमराई: फरवरी का चावल नहीं मिला,मार्च में कैसे बांटेंगे? दुकानदार-उपभोक्ता दोनों परेशान

कोरबा। कोरबा जिले में राशन वितरण व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। अमानक चावल भंडारण, जांच के दौरान बड़े पैमाने पर लॉट रोके जाने, परिवहन की खराब व्यवस्था और अधिकारियों की लापरवाही के कारण उचित मूल्य दुकानों में राशन पहुंचने में भारी देरी हो रही है।

उपभोक्ताओं को बार-बार दुकानों का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जबकि दुकानदार भी उपभोक्ताओं के गुस्से और अधिकारियों के दबाव के बीच फंस गए हैं।

फरवरी का चावल नहीं मिला, तो मार्च में कैसे बांटें?
शहर क्षेत्र की दुकानों को फरवरी और मार्च माह का राशन एक साथ वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन फरवरी माह का पूरा चावल अभी तक दुकानदारों को नहीं मिला है। मार्च का चावल भंडारण हो गया है, लेकिन फरवरी का आवंटन दोबारा जारी नहीं होने से कई दुकानों में फरवरी का राशन बिल्कुल नहीं है। ऐसे में दुकानदार दोनों महीनों का राशन एक साथ कैसे बांटेंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है।

उपभोक्ताओं को दुकानदारों ने अधिकारियों के आश्वासन के आधार पर बताया था कि फरवरी और मार्च का राशन साथ मिल जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

गोदामों में पर्याप्त चावल नहीं होने के कारण वितरण प्रभावित हो रहा है। मार्च महीना खत्म होते ही अप्रैल में अप्रैल, मई और जून तीन महीनों का चावल एक साथ बांटने की व्यवस्था करनी होगी, जिससे भीड़ और दबाव और बढ़ने की आशंका है।

दुकानदार भी परेशान
पीडीएस संचालक बताते हैं कि पिछले 7 महीने से उनकी कमीशन राशि भी नहीं मिल पाई है। अधिकारी उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं, बस निर्देश देते हैं कि राशन बांटो। लेकिन जब चावल ही नहीं पहुंच रहा, तो वे क्या बांटें? दुकानदारों को रोज सुबह से शाम तक उपभोक्ताओं की खरी-खोटी सुननी पड़ रही है।

तकनीकी अपग्रेडेशन से और देरी
इसके अलावा तकनीकी मशीनरी अपडेट का काम चल रहा है, जिसके कारण पिछले 5 दिनों से राशन वितरण और प्रभावित रहा है। उम्मीद है कि 25 मार्च तक अपग्रेडेशन पूरा होने के बाद 26 से 31 मार्च तक वितरण शुरू हो सकेगा, लेकिन संकट अभी भी गहरा बना हुआ है।

शहर की स्थिति खराब है तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति और भी बदतर होने की आशंका है। हालांकि प्रशासन ने अतिरिक्त ट्रांसपोर्टर लगाकर भंडारण तेज करने का दावा किया है, लेकिन फरवरी-मार्च का राशन एक साथ बांटने की व्यवस्था अभी भी दुरुस्त नहीं हो पाई है।