दादी हृदयमोहिनी के 5वें स्मृति दिवस पर विश्व सद्भावना भवन में भावपूर्ण श्रद्धांजली सभा

कोरबा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, कोरबा के विश्व सद्भावना भवन, टी.पी. नगर में संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी के 5वें स्मृति दिवस के अवसर पर एक अत्यंत भावपूर्ण स्मृति सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी (बी.के.) भाई-बहन और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वरीय स्मृति और मधुर गीतों से हुई। इसके बाद सभी उपस्थित बी.के. बहनों ने दादी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर माल्यार्पण किया। बी.के. सदस्यों ने भी श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर कई बी.के. बहनों ने दादी हृदयमोहिनी के साथ बिताए अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि दादी का जीवन सादगी, सेवा, ममता और आध्यात्मिकता का अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने अपना प्रत्येक क्षण ईश्वरीय सेवा और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया। उनका मधुर स्वभाव और आत्मीयता से अनगिनत लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा मिली।

बी.के. बिंदु दीदी ने कहा, “दादी हृदयमोहिनी का जीवन सेवा, समर्पण और आध्यात्मिकता की एक महान मिसाल था। उन्होंने संपूर्ण जीवन ईश्वर की याद में रहकर मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका स्नेह, सरलता और सभी के प्रति ममता भाव आज भी हमारे हृदयों में जीवित है।

दादी जी हमेशा राजयोग ध्यान के माध्यम से आत्मिक शक्ति प्राप्त करने और जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देती थीं।

उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी और शांति ईश्वर की याद और सेवा भाव में ही मिलती है।आज के इस स्मृति दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि दादी के बताए मार्ग पर चलते हुए प्रेम, शांति और सकारात्मकता के संस्कार अपनाएँ और समाज में आध्यात्मिक जागृति का संदेश फैलाएँ। यही उनकी प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

कार्यक्रम में उपस्थित बी.के. भाई-बहनों ने भी दादी के स्नेहिल मार्गदर्शन और प्रेरणा से मिली आध्यात्मिक शक्ति के अनुभव साझा किए। सभी ने सामूहिक संकल्प लिया कि दादी के आदर्शों को जीवन में अपनाकर समाज में शांति, प्रेम और सकारात्मकता का संदेश निरंतर फैलाते रहेंगे।

अंत में राजयोग ध्यान के माध्यम से दादी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई और समस्त विश्व की शांति एवं कल्याण के लिए ईश्वरीय याद में योग किया गया। कार्यक्रम का समापन ईश्वरीय प्रसाद वितरण के साथ हुआ।