होलिका दहन मध्यरात्रि में शुभ, चंद्र ग्रहण के सूतक ने बदली रंगोत्सव की तिथि: पंडित द्विवेदी ने की शंकाओं का समाधान

कोरबा। इस वर्ष होली पर्व पर चंद्र ग्रहण पड़ने से तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोग जानना चाह रहे हैं कि होलिका दहन कब करना चाहिए और रंग-गुलाल का उत्सव किस समय मनाना उचित रहेगा।

भागवताचार्य पंडित दशरथ नंदन द्विवेदी ने विस्तार से जानकारी देते हुए सभी शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने बताया कि पंचांग गणना के अनुसार 2 मार्च की मध्यरात्रि में होलिका दहन करना सर्वाधिक शुभ रहेगा। होलिका दहन सदैव भद्रा-रहित मुहूर्त में और पूर्णिमा तिथि पर ही किया जाना चाहिए। ग्रहण के कारण उत्पन्न भ्रम के बावजूद शास्त्रों के अनुसार मध्यरात्रि का समय उपयुक्त है।

पंडित द्विवेदी ने आगे कहा कि चंद्र ग्रहण के कारण सूतक काल प्रभावी रहेगा। सूतक शुरू होने से पहले यदि संभव हो तो रंग-गुलाल का उत्सव मनाया जा सकता है, अन्यथा श्रद्धालु 4 मार्च को रंगोत्सव (धुलंडी) मना सकते हैं। ग्रहण काल में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान वर्जित हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जिसका मूल संदेश प्रेम, सौहार्द और भाईचारा है।

तिथियों के भ्रम में पड़ने के बजाय श्रद्धा और शास्त्र सम्मत नियमों से पर्व मनाना उचित है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि खगोलीय घटनाएं समय-समय पर त्योहारों को प्रभावित करती हैं, लेकिन शास्त्रों का पालन सर्वोत्तम रहता है।

निष्कर्ष: 2 मार्च मध्यरात्रि में होलिका दहन शुभ, रंगोत्सव सूतक से पूर्व या 4 मार्च को मनाएं।