कोरबा।केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों के स्थान पर 4 नए लेबर कोड लागू किए जाने के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। छत्तीसगढ़ सहित कोरबा जिले के कोल सेक्टर में भी हड़ताल की तैयारी की गई है। हालांकि प्रबंधन ने दावा किया है कि कोयला उत्पादन प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि श्रम शक्ति नीति 2025 को पूर्णतः निरस्त किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं सेवाओं जैसे रेलवे, बंदरगाह, कोयला खदानें, तेल, इस्पात, रक्षा, सड़क परिवहन, हवाई अड्डे, बैंक, बीमा, दूरसंचार, डाक, परमाणु ऊर्जा और विद्युत उत्पादन का निजीकरण कर रही है।
साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यापारीकरण से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर भी यूनियनें सरकार को घेर रही हैं।
यूनियन नेताओं का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर देशभर में व्यापक विरोध दर्ज कराया जाएगा, जिससे श्रमिकों के पक्ष में माहौल बने।
हड़ताल को लेकर एसईसीएल के विभिन्न श्रमिक संगठनों नत्थूलाल पाण्डेय (महासचिव, केएमएस-एचएमएस), अजय विश्वकर्मा (महासचिव, एसकेएमएस-एटक), गोपाल नारायण सिंह (अध्यक्ष, एसईकेएमसी-इंटक) एवं व्ही.एम. मनोहर (महासचिव, केएसएस-सीटू)—ने समर्थन देते हुए श्रमिकों से एकजुट होने का आह्वान किया है।
सिस्टा का भी समर्थन
कोल इंडिया एससी/एसटी एम्प्लाइज एसोसिएशन (सिस्टा) ने भी देशव्यापी आम हड़ताल को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित प्रस्ताव क्रमांक-02 के तहत यह निर्णय लिया गया। अध्यक्ष आरपी खाण्डे ने कहा कि लेबर कोड बिल श्रमिक विरोधी है और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों के प्रतिकूल है।
इधर, कोल प्रबंधन का कहना है कि हड़ताल के संभावित प्रभाव को देखते हुए वैकल्पिक रणनीति तैयार की गई है और कोयला उत्पादन एवं आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जाएंगे। अब देखना होगा कि हड़ताल का कोरबा के कोल सेक्टर पर कितना असर पड़ता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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