कोरबा।जिले के आदिवासी बाहुल्य परला गांव में जल जीवन मिशन के तहत लाखों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद ग्रामीणों की प्यास बुझ नहीं पा रही है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को आज भी नाले के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी की दस्तक के साथ ही गांव में जल संकट को लेकर चिंता और गहरा गई है।
नेशनल हाईवे-130 पर स्थित परला गांव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा जल जीवन मिशन का क्रियान्वयन कराया गया था। योजना शुरू होने के दौरान ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें पेयजल की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत काम तो हुआ, लेकिन नियमित और पर्याप्त पानी की आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
केवल परला ही नहीं, बल्कि आसपास के कई अन्य गांवों में भी यही स्थिति बनी हुई है, जहां जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारी राशि खर्च की गई, परंतु जमीनी स्तर पर लाभ नहीं मिल रहा है। मजबूरी में ग्रामीण आसपास के जल स्रोतों और नालों का पानी उपयोग कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।
पीएचई प्रोजेक्ट डिवीजन के कार्यपालन अभियंता एस.एस. पैकरा ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या सामने आ रही है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। संबंधित बोर और पाइपलाइन का निरीक्षण किया जाएगा तथा जो भी तकनीकी खामी होगी, उसे दूर किया जाएगा।
ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया है, जिसके बाद सर्वे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
हालांकि, गांव के लोग आशंकित हैं कि कहीं इस बार भी उन्हें गर्मी पानी की किल्लत के बीच न काटनी पड़े। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गर्मी से पहले समस्या का समाधान होता है या फिर एक और साल इंतजार में गुजर जाएगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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