कोरबा। एनटीपीसी कोरबा परियोजना में कार्यरत ठेका मजदूरों के हक पर खुलेआम डाका डाले जाने का गंभीर मामला सामने आया है। लाखों-करोड़ों के कार्य कराने वाले कई ठेकेदार सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी का भुगतान केवल कागजों में कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता में मजदूरों से प्रतिदिन 400 रुपये की जबरन वसूली की जा रही है।
इस शोषण के खिलाफ मजदूरों ने ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर जमनीपाली से कोरबा कलेक्टोरेट तक पदयात्रा कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
श्रम कानून के तहत ठेका मजदूरों के लिए 780 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित है, लेकिन मजदूरों का आरोप है कि पूरी राशि बैंक खाते में डालने के बाद ठेकेदार दबाव बनाकर आधी से अधिक रकम वापस ले लेते हैं। विरोध करने पर मजदूरों को काम से निकालने की धमकी दी जाती है, जिससे वे मजबूरी में शोषण सहने को विवश हैं।
झंडा-बैनर के साथ बड़ी संख्या में मजदूर पदयात्रा करते हुए कोरबा पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ठेकेदारों के साथ-साथ एनटीपीसी के मानव संसाधन विभाग के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि गुरु मूर्ति ने बताया कि एनटीपीसी के एचआर प्रभारी शशि शेखर सहित संबंधित ठेकेदारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि मजदूरों से तय राशि लौटाने से इनकार करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।
मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और ठेका मजदूरों को उनका पूरा हक दिलाया जाए।
Editor – Niraj Jaiswal
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