कोरबा-पश्चिम में 1320 मेगावाट के नए हसदेव पावर प्लांट का निर्माण शुरू, कुसमुंडा खदान से होगी सालाना 65 लाख टन कोयले की आपूर्ति

कोरबा । राज्य बिजली उत्पादन कंपनी के कोरबा-पश्चिम स्थित हसदेव ताप विद्युत परियोजना (एचटीपीपी) के दूसरे चरण के तहत 1320 मेगावाट क्षमता के नए पावर प्लांट का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। नई दो इकाइयों के शुरू होने के बाद संयंत्र को सालाना लगभग 65 लाख टन कोयले की आवश्यकता होगी, जिसकी आपूर्ति कोल लिंकेज नीति के तहत एसईसीएल की कुसमुंडा कोयला खदान से की जाएगी।

वर्तमान में कोरबा-पश्चिम स्थित हसदेव थर्मल पावर स्टेशन में 210 मेगावाट की चार इकाइयाँ और पहले चरण की 500 मेगावाट की एक इकाई संचालित है। इस प्रकार संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 1340 मेगावाट है। सभी इकाइयों को कुसमुंडा खदान से कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से कोयले की आपूर्ति की जाती है। खदान से संयंत्र तक तीन कन्वेयर बेल्ट लाइनें स्थापित हैं, जिनसे प्रतिदिन औसतन 24 हजार टन कोयला पहुंचाया जा रहा है।

दूसरे चरण के विस्तार के बाद कोयले की बढ़ती मांग को देखते हुए एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन खदान विस्तार की तैयारी में जुट गया है। इसके तहत अधिग्रहित ग्राम खोडरी, पाली और रिस्दी के प्रभावितों को रोजगार उपलब्ध कराकर चिन्हित पुनर्वास स्थलों पर बसाया जा रहा है।

कुसमुंडा फोरलेन सड़क के किनारे चयनित नए बसाहट क्षेत्र में सड़क, नाली सहित मूलभूत सुविधाओं का विकास कार्य जारी है।

नए पावर प्लांट की कोयला आवश्यकता केवल कन्वेयर बेल्ट से पूरी नहीं हो पाएगी, इसलिए रेल मार्ग से कोयला परिवहन की योजना बनाई गई है। संयंत्र से सुराकछार खदान की साइडिंग तक पूर्व से बिछी रेल लाइन का उपयोग किया जाएगा। रेल लाइन के मरम्मत, परीक्षण और संयंत्र के समीप एमजीआर प्रणाली स्थापित होने के बाद मालगाड़ियों से कोयला आपूर्ति शुरू की जाएगी। इसके लिए रेलवे राइट्स के तहत सर्वे भी पूरा किया जा चुका है।

कुसमुंडा खदान विस्तार के लिए कुल 136.339 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

कोल आरएंडआर पॉलिसी-2012 के तहत 168 भू- विस्थापितों को एसईसीएल में रोजगार दिया जाएगा।

हालांकि नई नीति के तहत छोटे खातेदारों को पूर्व की तरह सीधे नौकरी का लाभ नहीं मिल पाएगा।