कोरबा। छुरीकला में बुनकर समितियों के अध्यक्षों, प्रबंधकों एवं सदस्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान नेतृत्व क्षमता एवं कौशल विकास पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर बताया गया कि हाथकरघा क्षेत्र भारत की सबसे बड़ी असंगठित आर्थिक गतिविधियों में से एक है, जो देशभर में 35 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर ग्रामीण एवं अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका का प्रमुख आधार बना हुआ है।
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि यह क्षेत्र 25 लाख से अधिक महिला बुनकरों एवं संबद्ध कामगारों को रोजगार से जोड़ने में सफल रहा है।
राज्य बुनकर प्रशिक्षण संस्थान के प्रतिनिधि ने बताया कि हाथकरघा क्षेत्र में कम पूंजी की आवश्यकता, न्यूनतम बिजली उपयोग, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन, छोटे स्तर पर लचीला उत्पादन, नवाचार की संभावनाएं और बाजार की मांग के अनुरूप ढलने की क्षमता जैसे कई लाभ हैं।
उन्होंने कहा कि डिजाइन की विशिष्टता, छोटे बैच में उत्पादन की क्षमता तथा पर्यावरण हितैषी वस्त्र होने के कारण हाथकरघा उत्पादों की घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मांग बनी हुई है। शासन समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और बुनकरों को आर्थिक रूप से सशक्त करने, उनके पारंपरिक कार्य को जीवंत रखने, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने तथा अधिक से अधिक रोजगार सृजन करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में निराकार नाहक, लक्ष्मी प्रसाद देवांगन, रामधार देवांगन, फूलबाई देवांगन, यशवंत देवांगन सहित प्रशिक्षक व्याख्याता पी.एल. सोनी, एस.के. पटेल, राजेश कुमार साहू एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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