तंबाखू के दुष्प्रभावों से अवगत हुए 150 शिक्षक, तंबाखू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

कोरबा। तंबाखू और उससे बने उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसका प्रभाव तुरंत न दिखे, लेकिन समय के साथ यह श्वसन तंत्र, हृदय, किडनी सहित शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। तंबाखू के इन्हीं खतरों के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से तंबाखू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 150 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी के नेतृत्व में 19 व 20 जनवरी को शिक्षा विभाग के शिक्षकों हेतु दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में तंबाखू सेवन से होने वाली कैंसर, हृदय रोग, सांस संबंधी बीमारियों सहित अन्य शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान कोटपा अधिनियम 2003 की प्रमुख धाराओं को समझाया गया तथा स्कूलों को तंबाखू मुक्त शिक्षण संस्थान बनाने के लिए निर्धारित मापदंडों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही तंबाखू सेवन छोड़ने के उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यशाला में जिला चिकित्सालय कोरबा स्थित तंबाखू नशामुक्ति केंद्र में उपलब्ध नि:शुल्क परामर्श एवं दवाइयों की सुविधा से भी शिक्षकों को अवगत कराया गया। इस अवसर पर स्कूलों के लिए आईईसी सामग्री और पाम्पलेट का वितरण भी किया गया।

कार्यशाला को सफल बनाने में डॉ. कुमार पुष्पेश (नोडल अधिकारी, तंबाखू नियंत्रण कार्यक्रम), पद्माकर शिंदे (जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एनएचएम), डॉ. मानसी जायसवाल (सलाहकार, एनटीसीपी), दुश्यंत कोटांगले (एफएलओ) तथा संतोष केवट (सोशल वर्कर, एनटीसीपी) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।