गवाही के दौरान गवाह की बिगड़ी तबीयत,जज की तत्परता ने बचाई जान –मानवीय संवेदना की मिसाल

कोरबा। जिला न्यायालय में उस समय मानवीय संवेदना की अनूठी मिसाल देखने को मिली, जब गवाही दे रहे एक साक्षी को अचानक पैनिक अटैक आ गया। न्यायिक दण्डाधिकारी कुमारी कुमुदिनी गर्ग की त्वरित सूझबूझ से स्थिति संभल गई और गवाह की जान बचाई जा सकी।

दोपहर करीब 1 बजे चल रही सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष के अधिवक्ता निखिल शर्मा गवाही करवा रहे थे, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल देवांगन प्रतिपरीक्षण कर रहे थे। इसी बीच साक्षी असहज महसूस करने लगा।

न्यायाधीश ने तुरंत उसकी तबीयत के बारे में पूछा और स्थिति बिगड़ते देख कर्मचारियों को कुर्सी पर बैठाने व डॉक्टर बुलाने के निर्देश दिए।

कुछ ही मिनटों में पहुंचे चिकित्सक ने परीक्षण कर पैनिक अटैक की पुष्टि की। डॉक्टर की सलाह पर न्यायालय ने साक्ष्य कार्यवाही स्थगित कर दी। चिकित्सक ने बताया कि गवाह की हालत अब सामान्य है और कोई स्थायी खतरा नहीं है।

न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं ने जज कुमुदिनी गर्ग की तत्परता और संवेदनशीलता की खूब सराहना की।

यह घटना न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय पक्ष की याद दिलाती है।