कोरबा। दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे बिलासपुर के नवपदस्थापित मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) राकेश रंजन ने पदभार ग्रहण करने के दूसरे दिन ही कोरबा प्रवास किया। उन्होंने कोरबा रेलवे स्टेशन में चल रहे यार्ड री-मॉडलिंग कार्य का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
डीआरएम ने इमलीडुग्गू रेलवे फाटक के समीप यार्ड री-मॉडलिंग के लिए तैयार मैप प्लान का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि यार्ड री-मॉडलिंग का काम एक साल से चल रहा है, जिसमें मानिकपुर कोल साइडिंग और इमलीडुग्गू फाटक पर प्रस्तावित ओवरब्रिज बड़ी बाधा बन रहा है।
छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हुए कार्य में तेजी लाने के उपाय खोजने होंगे। लगातार बढ़ते कोल डिस्पैच के दबाव से राहत दिलाने के प्रयास सभी की जिम्मेदारी है।
स्टेशन में क्रू लॉबी का निरीक्षण करते हुए डीआरएम ने रनिंग स्टाफ से चर्चा की और उनकी परेशानियों को सुना। उन्होंने स्टाफ को ड्यूटी ईमानदारी एवं सजगता से निभाने का निर्देश दिया।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर डीआरएम ने नाराजगी व्यक्त की। प्लेटफॉर्म पर अधूरा एफओबी, एआरएम रूम के पास पुरानी सेफ्टीवॉल की कमी, बिखरी निर्माण सामग्री और अन्य अधूरे कार्यों का जायजा लेते हुए उन्होंने इन्हें शीघ्र पूरा करने तथा सामग्री व्यवस्थित करने के निर्देश दिए।
गेवरारोड स्टेशन का भी निरीक्षण
डीआरएम श्री रंजन ने गेवरारोड स्टेशन का भी दौरा किया। यहां स्टेशन परिसर एवं कोल साइडिंग का निरीक्षण करने के साथ संभावित विस्तार कार्यों की जानकारी ली। पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर से जुड़ने की योजना के तहत लाइन विस्तार एवं यार्ड के नए सिरे से विकास पर अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। निरीक्षण उपरांत शाम 4 बजे वे बिलासपुर लौट गए।
रेल संघर्ष समिति की प्रतिक्रिया
रेल संघर्ष समिति कोरबा के संयोजक रामकिशन अग्रवाल ने डीआरएम के प्रवास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नए डीआरएम पहली बार कोरबा आए, लेकिन उनके प्रवास की योजना को गोपनीय रखा गया, जिससे यात्री हित प्रभावित हुए। समिति का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलकर यात्रियों की समस्याओं पर चर्चा और सुझाव देना चाहता था, लेकिन गोपनीयता के कारण यह संभव नहीं हो सका।
Editor – Niraj Jaiswal
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