कोरबा। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी की प्रक्रिया कोरबा जिले में बेहद धीमी गति से चल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खरीदी की रफ्तार सुस्त होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सीमित दैनिक खरीदी सीमा, ऑनलाइन टोकन सिस्टम में अव्यवस्थाएं और तकनीकी गड़बड़ियों ने छोटे-सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
सरकारी दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शासन का कहना है कि निर्धारित समयसीमा में सभी पंजीकृत किसानों से धान खरीदा जाएगा, छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और उपार्जन केंद्रों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लेकिन किसान बताते हैं कि दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के लिए टोकन 31 जनवरी तक उपलब्ध होने के कारण वे अंतिम सप्ताह तक इंतजार करने को मजबूर हैं।
आशंका है कि अंतिम दिनों में खरीदी सख्त होने पर छोटे किसानों की उपज बिना बिके रह जाएगी। वहीं, बड़े और जागरूक किसान एक साथ कई टोकन लेकर अपना पूरा धान बेच चुके हैं।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगता है कि खरीदी शुरू हुए करीब 40 दिन बीतने के बावजूद जिले में मात्र 20 प्रतिशत किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। शेष 80 प्रतिशत किसानों के सामने समयसीमा समाप्त होने और धान न बिकने का खतरा मंडरा रहा है।
इसके अलावा एग्री स्टैक पोर्टल की समस्याओं से खाता-रकबा संशोधन नहीं हो पा रहा, दिवंगत किसानों के वारिसों की एंट्री अटकी हुई है, पटवारी गिरदावरी में गलत फसलें जुड़ रही हैं और पट्टा त्रुटियों का निराकरण लंबित है। मिसाई कर चुके किसानों को भी टोकन मिलने में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि जिन 20 प्रतिशत किसानों ने धान बेचा है, उन्हें भुगतान राशि जल्द मिल रही है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि खरीदी की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो बड़े स्तर पर आंदोलन हो सकता है। जिला प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि शेष बचे 30 दिनों में व्यवस्थाएं दुरुस्त कर सभी किसानों का धान खरीदा जाए।
Editor – Niraj Jaiswal
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