कोरबा। पसरखेत रेंज के कोल्गा और ठाकुरखेता गांव के ग्रामीणों ने वन विभाग की कूप कटाई पर गहरा विरोध जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कूप संख्या-2 में मृत और अनुपयोगी पेड़ों की कटाई-छंटाई के नाम पर कोयला खदान खोलने का रास्ता साफ किया जा रहा है। इस मुद्दे पर ग्रामीणों ने जन दर्शन में शिकायत दर्ज कराई और डीएफओ कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कोल्गा क्षेत्र में कोयला सर्वेक्षण की कोशिशें हुई थीं, जिन्हें उन्होंने विरोध कर रोक दिया था। एमईसीएल और सीएमपीडीआई की टीमों को यहां से लौटना पड़ा था। अब कूप कटाई से कोल्गा गुफा जैसे प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और वन विभाग की टीम के बीच टकराव हुआ था, जिसमें ग्रामीणों ने कटाई के औजार जब्त कर लिए थे।
इसके बाद वन विभाग ने करतला पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर करीब 50 ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
ग्रामीणों ने इसे गलत बताते हुए कहा कि एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं, वे प्रदर्शन में शामिल ही नहीं थे।
कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत स्वीकार कर विचार करने का आश्वासन दिया है।
कोरबा डीएफओ प्रेमलता यादव ने स्पष्ट किया कि कूप कटाई पूरी तरह नियमों के तहत हो रही है। पिछले साल कूप संख्या-1 और इस साल कूप संख्या-2 के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति ली गई है।
ग्रामीणों के विरोध से 15 दिनों से काम बंद है। चिन्हित पेड़ों पर आपत्ति का संज्ञान लिया गया है और स्थानीय लोगों को काम में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। डीएफओ ने किसी कोयला खदान प्रस्ताव से अनभिज्ञता जताई।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पर्यावरण बचाने के लिए कोयला खनन का हर प्रयास का विरोध जारी रखेंगे।
Editor – Niraj Jaiswal
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