मृत मतदाताओं के नाम काटने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और पंचनामा अनिवार्य, SIR की अवधि 18 दिसंबर तक बढ़ी

कोरबा। भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) कार्यक्रम की अवधि एक बार फिर बढ़ा दी है। अब यह प्रक्रिया 18 दिसंबर तक चलेगी। साथ ही, मृत मतदाताओं और स्थानांतरित हुए लोगों के नाम हटाने या संशोधन की प्रक्रिया को और सख्त बना दिया गया है।

नए निर्देशों के अनुसार, मृत मतदाताओं के नाम विलोपित करने के लिए अब मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। इसके अलावा परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों की मौजूदगी में पंचनामा भी कराना जरूरी होगा।

इसी तरह, जो मतदाता अपने पते से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, उनके मामलों में भी पंचनामा के जरिए पुष्टि अनिवार्य कर दी गई है।

पहले केवल परिजनों या पड़ोसियों से पूछताछ कर फॉर्म में एंट्री करने की व्यवस्था थी, जिसके तहत कोरबा जिले के बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) ने काफी काम पूरा भी कर लिया था। लेकिन अब आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है। तकनीकी और कानूनी रूप से मजबूत प्रमाण के साथ ही नाम हटाने या संशोधन को मान्यता मिलेगी।

आयोग के इस कदम के पीछे वजह कुछ स्थानों पर उठे विवाद बताए जा रहे हैं। कहीं जीवित लोगों के नाम कटने की शिकायतें आईं, तो कहीं केवल बूथ बदलने वाले मतदाताओं के नाम पूरी तरह विलोपित कर दिए गए। इन विवादों से बचने और प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ये नए नियम लागू किए गए हैं।

बीएलओ और बीएलए का कहना है कि अगर शुरू में ही ये निर्देश स्पष्ट कर दिए जाते तो समय और मेहनत दोनों बच जाती। अब बढ़ी हुई अवधि में उन्हें अतिरिक्त औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। जिले में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन डाटा अपडेट के बाद होगा।