कारगिल योद्धा प्रेमचंद पांडे का आमरण अनशन NHAI अधिकारी के आश्वासन पर समाप्त, टोल प्लाजा में करोड़ों के घोटाले का आरोप

कोरबा । कारगिल युद्ध के वीर एवं पूर्व सैनिक प्रेमचंद पांडे ने NHAI टोल संचालक विनोद कुमार जैन पर सर्कुलर उल्लंघन कर करोड़ों रुपये की ठगी, ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली, भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के घोटाले सहित गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए 9 दिसंबर से शुरू किया आमरण अनशन रविवार को समाप्त कर दिया।

NHAI परियोजना अधिकारी डी.डी. परलावर ने अनशन स्थल पर पहुंचकर शिकायतों को केंद्रीय कार्यालय एवं उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

आश्वासन पर जूस और नारियल पानी पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।

प्रेमचंद पांडे की मुख्य मांगें हैं:
टोल संचालन का ठेका अरबपतियों की जगह पूर्व सैनिकों को दिया जाए।
सर्कुलर के अनुसार पूर्व सैनिकों को मैनपावर और गनमैन के रूप में रखा जाए।
स्थानीय लोगों को निर्धारित मानदेय दिलाया जाए।
ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली बंद हो और राजस्व की चोरी रुके।
सभी शिकायतों की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए।

उन्होंने केंद्र सरकार एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इन मांगों को उठाया है।

अनशन के दौरान 6 दिनों तक कोई प्रशासनिक अधिकारी या स्वास्थ्य टीम उनकी सुध लेने नहीं पहुंची, जिस पर पांडे ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, “यह पूर्व सैनिकों के प्रति जिला प्रशासन की संवेदनशीलता दिखाता है। कोरबा प्रशासन बहरा और गूंगा साबित हुआ है। अब मैं दिल्ली में आमरण अनशन करूंगा।”

साथ ही, NHAI अधिकारी, मीडिया और शुभचिंतकों का आभार जताते हुए कहा कि रविवार को भी अधिकारी ने समय निकालकर समस्या सुनी और निराकरण का भरोसा दिया।

यह मामला पूर्व सैनिकों के अधिकारों, टोल संचालन में पारदर्शिता और कथित बड़े घोटालों को उजागर करता है।