राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्पर्श क्लीनिक की टीम ने छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को दिए तनाव से बचने के आसान उपाय
कोरबा। कमला नेहरू महाविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “स्पर्श क्लीनिक” की ओर से तनाव प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाले तनाव के लक्षणों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला अस्पताल (बिसाहूदास महंत चिकित्सा महाविद्यालय) के काउंसलर ताराचंद श्रीवास ने कहा, “सोने का समय हो जाने के बाद भी रात में नींद न आना दिमागी तनाव का सबसे बड़ा अलार्म है।
इसी तरह बात-बात पर गुस्सा आना भी दूसरा खतरे का संकेत है। अगर इन पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं।”
उन्होंने इंसोम्निया (नींद न आना) और हाइपोम्निया (अधिक नींद आना) जैसी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि काम के दबाव में लोग अक्सर नींद को टालते रहते हैं, जिससे तनाव बढ़ता है। तर्कसंगत व्यवहार अपनाने और छोटे-छोटे ब्रेक लेने की सलाह दी गई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने कहा, “खुश रहना है तो गुस्से को दूर रखें और सरल-सहज व्यक्तित्व अपनाएं। हर स्थिति में आत्मनियंत्रित रहें, सामने वाला गुस्से में हो तो भी आप शांत और विनम्र रहें। मुस्कुराता चेहरा देखकर दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है, जबकि रूखे-सूखे चेहरे से हर कोई दूर भागता है।”
कार्यशाला में स्पर्श क्लीनिक की टीम – ताराचंद श्रीवास, आंचल राठौर, तृप्ती, शारदा कंवर, अंजू और प्रभजोत ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए तथा तनाव के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. भारती कुलदीप, श्रीमती अंजू खेस, अय्यर क्लासेस की डायरेक्टर श्रीमती राजश्री अय्यर, ज्योति पटेल, अक्षय प्रधान, रोहित सोनी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
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