छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: जन विश्वास विधेयक, नक्सली प्रकरण वापसी और अनुपूरक बजट को हरी झंडी

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में आत्मसमर्पित नक्सलियों से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा और उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई। इसके अलावा ‘छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025’ को स्वीकृति मिली, जिसके तहत 11 विभागों के 14 अधिनियमों में संशोधन किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य छोटे उल्लंघनों के मामलों को सरल बनाना, त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना और न्यायालयों पर बोझ कम करना है।

इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले राज्य सरकार 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन कर चुकी है। अब नए विधेयक में 116 प्रावधानों को और सरल बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ ऐसा दूसरा संस्करण लाने वाला देश का पहला राज्य है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों के मामलों पर निर्णय के लिए मंत्रिपरिषद उप समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया है, जो प्रकरणों की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

जिला स्तर पर भी समिति बनेगी, जिसके आधार पर प्रकरणों को विधि विभाग और उप समिति के माध्यम से मंत्रिपरिषद के अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। केंद्र से जुड़े मामलों पर भारत सरकार की अनुमति आवश्यक होगी, जबकि अन्य प्रकरणों को न्यायालय में वापसी हेतु जिलाधीश को भेजा जाएगा।

बैठक में वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक बजट को विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025’ को भी मंजूरी दी गई।