कोरबा।जिले के करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम सेंद्रीपाली में दो महीने से डेरा जमाए 8-10 हाथियों के दल ने आखिरकार गांव छोड़ दिया। वजह चौंकाने वाली है – ग्रामीणों ने दल में आए नन्हें बेबी एलीफेंट की छठी मनाई।
दिवाली से पहले आए इस हाथी दल ने रात में खेतों में रखी फसल चौपट कर दी थी। हाथी भगाने के सारे जतन – मशाल, पटाखे, ट्रैक्टर दौड़ाना – नाकाम रहे। ऊपर से बिजली विभाग शाम से सुबह तक गांव की बिजली काट देता था ताकि हाथियों को करंट न लगे। अंधेरे में डर और बच्चों की पढ़ाई ठप होने से ग्रामीण परेशान थे।
तभी गांव के बुजुर्गों ने अनोखा सुझाव दिया – “नए मेहमान की छठी मनाओ, हाथी खुद चले जाएंगे।”
रविवार को पूरे गांव ने चंदा इकट्ठा किया। करीब 200 ग्रामीण जंगल की सीमा पर पहुंचे। अगरबत्ती जलाकर, नारियल फोड़कर, खीर-पूड़ी और दाल-चावल बनाकर बेबी एलीफेंट की छठी धूमधाम से मनाई गई। कुछ भोजन जंगल में हाथियों के लिए भी छोड़ा गया।
अगले ही दिन से हाथी गायब! मंगलवार तक दल पूरी तरह लौट चुका था। वन विभाग के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद हाथी एक महीने तक एक ही इलाके में रहते हैं। यह दल अब रायगढ़ के धरमजयगढ़ क्षेत्र की ओर चला गया है।
ग्रामीण बोले – “विश्वास नहीं होता, लेकिन सचमुच काम कर गया। अब रात में बिजली भी जल रही है और नींद भी पूरी हो रही है!”
लोग इसे परंपरा और प्रकृति के साथ तालमेल का अनोखा उदाहरण बता रहे हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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