“अक्षर ज्ञान की अद्भुत ललक: सास-बहू से लेकर पिता-पुत्री तक एक साथ बैठे ‘उल्लास’ नवसाक्षर परीक्षा में”

कोरबा। अक्षर ज्ञान की ललक और शिक्षा की नई रोशनी ने रविवार को कोरबा जिले में एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। ‘उल्लास’ नवभारत साक्षरता कार्यक्रम अंतर्गत 7 दिसंबर को आयोजित बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान परीक्षा में न सिर्फ महिलाएं और पुरुष, बल्कि बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जिले के 648 परीक्षा केंद्रों पर ऐसी कई प्रेरक कहानियां सामने आईं, जिनमें सास-बहू, ससुर-बहू और पिता-पुत्री एक साथ बैठकर परीक्षा देते दिखाई दिए।

यह परीक्षा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयीन शिक्षण संस्थान की पहल पर, कलेक्टर अजीत वसंत (IAS) के निर्देशन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की गई।

परिवारों ने पेश की मिसाल

पाली ब्लॉक के प्राथमिक शाला जमनीपारा केंद्र में 61 वर्षीय सास बृंदा बाई, 66 वर्षीय ससुर भैयाराम श्याम और 38 वर्षीया बहू संतोषी बाई ने मिलकर परीक्षा दी। वहीं करतला के मदवानी केंद्र में पिता पंचराम प्रजापति और उनकी बेटी आशा प्रजापति एक साथ परीक्षा में शामिल हुए।
पाली के ही नुनेरा केंद्र में सास विमला बाई और बहू शकुन (35) ने शिक्षा के प्रति जागरूकता का परिचय दिया।

86 वर्ष की अंजोरा बाई बनीं प्रेरणा

पाली विकासखंड के छिंदपानी परीक्षा केंद्र में 86 वर्षीय अंजोरा बाई भी उत्तर पुस्तिका लेकर पूरे उत्साह से परीक्षा देने पहुंचीं। उन्होंने साबित किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

महिलाओं की भागीदारी रही सबसे अधिक

जिला परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा ने बताया कि इस परीक्षा में कुल 15,950 शिक्षार्थी शामिल हुए, जिनमें पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक रही।

महिला शिक्षार्थी — 11,155

पुरुष शिक्षार्थी — 4,795

विकासखंडवार सहभागिता

कोरबा: 4098 (2736 महिलाएं, 1362 पुरुष)

पाली: 3973 (2938 महिलाएं, 1035 पुरुष)

करतला: 2092

कटघोरा: 2406

पोड़ी उपरोड़ा: 2570

150 अंकों की कौशल परीक्षा

परीक्षा में पढ़ना, लिखना और गणित—तीनों विषयों के लिए 50-50 अंक निर्धारित थे। सफल अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान एवं राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, बीआरसी, सीआरसी, संकुल समन्वयकों, डाइट प्राचार्य एवं डाइट स्टूडेंट्स ने परीक्षा संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘उल्लास’ परीक्षा में शामिल शिक्षार्थियों का उत्साह साबित करता है कि कोरबा जिले में साक्षरता एक सामाजिक अभियान बन चुकी है, जहां परिवार मिलकर सीखने की नई परंपरा गढ़ रहे हैं।