कुसमुंडा भू-विस्थापित महिलाओं का अनिश्चितकालीन आंदोलन एक महीने के लिए स्थगित, नहीं मानी मांगें तो फिर सड़क पर उतरने की चेतावनी

कोरबा । एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में पुश्तैनी जमीन गंवाने वाली भू-विस्थापित महिलाओं का दो दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को प्रशासन व प्रबंधन के ठोस आश्वासन के बाद फिलहाल एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया। हालांकि महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक महीने में रोजगार, पुनर्वास और बसाहट सहित सभी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे फिर से बड़ा आंदोलन करेंगी।

आंदोलन के दूसरे दिन कुसमुंडा प्रबंधन और पुलिस-प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए महिला नेताओं गोमती केवट, सरिता, इंद्रा सहित कई महिलाओं को गिरफ्तार कर दर्री तहसील लाया गया।

तहसीलदार ने वहाँ महिलाओं को आश्वासन दिया कि “एक महीने के अंदर सभी भू-विस्थापितों के रोजगार, पुनर्वास, बसाहट और लंबित मुआवजे की समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा”। इस लिखित-पत्रक युक्त आश्वासन के बाद सभी महिलाओं को मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

रिहाई के बाद महिला नेता गोमती केवट ने कहा, “यह आश्वासन सिर्फ खानापूर्ति नहीं होना चाहिए। अगर एक महीने में हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं तो हम फिर से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगी, इस बार और बड़ा और सख्त होगा।”

महिलाओं का कहना है कि जिन खदानों से देश-प्रदेश को बिजली और राजस्व मिल रहा है, उसी की कीमत पर उनकी जमीन गई, लेकिन आज तक नौकरी, ठोस पुनर्वास और अन्य सुविधाएँ नहीं मिलीं। वे प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से अपील कर रही हैं कि दमन की जगह संवाद और न्यायपूर्ण समाधान अपनाया जाए।

फिलहाल एक महीने का अल्टीमेटम चल रहा है। जनवरी में यदि समाधान नहीं हुआ तो कुसमुंडा क्षेत्र में फिर से महिलाओं का उग्र आंदोलन देखने को मिल सकता है।